लखनऊ। उत्तर प्रदेश में युवाओं को नशे के जाल से बाहर निकालने और ड्रग माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए योगी सरकार अब निर्णायक कदम उठाने जा रही है। राज्य में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ लड़ाई को और धार देने के उद्देश्य से एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को पूरी तरह सशक्त और संसाधनयुक्त बनाने का फैसला किया गया है। इसके तहत न केवल बल की संख्या बढ़ाई जाएगी, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर तैनात कर्मियों की जगह रेग्युलर पुलिसकर्मियों की स्थायी तैनाती भी की जाएगी।
अब ‘अस्थायी व्यवस्था’ नहीं, बनेगी स्थायी और मजबूत फोर्स
अब तक एएनटीएफ में अधिकांश पुलिसकर्मी प्रतिनियुक्ति के आधार पर तैनात थे, जिससे लंबी अवधि की रणनीति और निरंतर कार्रवाई में बाधा आ रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एएनटीएफ को पूर्णकालिक और नियमित बल उपलब्ध कराया जाए, ताकि ड्रग नेटवर्क पर लगातार और प्रभावी कार्रवाई हो सके।
थानों और यूनिटों को मिलेगी पूरी क्षमता
एएनटीएफ के आईजी अब्दुल हमीद बताते हैं कि-
आईजी अब्दुल हमीद
वर्ष 2022 में गठित इस विशेष बल के तहत प्रदेश में 6 थाने और 8 यूनिट बनाई गई थीं। प्रत्येक थाने में 28 और प्रत्येक यूनिट में 18 पदों का नियतन है। इनमें निरीक्षक, उपनिरीक्षक, कंप्यूटर ऑपरेटर, मुख्य आरक्षी, आरक्षी, चालक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं।
हालांकि नियत ढांचे के बावजूद अब तक सभी पदों पर तैनाती नहीं हो सकी थी, जिससे फील्ड ऑपरेशन प्रभावित हो रहे थे।
150 नए जांबाजों की तैनाती से बढ़ेगी कार्रवाई की रफ्तार
वर्तमान में एएनटीएफ में कुल 386 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 236 पदों पर ही अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। यानी 150 पद अभी खाली हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इन सभी रिक्त पदों को जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके साथ ही आधुनिक तकनीकी उपकरण, निगरानी सिस्टम और ऑपरेशनल संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
युवाओं के भविष्य को बचाने की मुहिम
सरकार का मानना है कि ड्रग माफिया केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और पीढ़ीगत संकट है। एएनटीएफ को मजबूत कर सरकार युवाओं को नशे की गिरफ्त से मुक्त करने, सप्लाई चेन को तोड़ने और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर प्रहार करने की दिशा में ठोस संदेश देना चाहती है।
नशे के सौदागरों के लिए यूपी में कोई जगह नहीं
सीएम योगी के इस फैसले को ड्रग माफियाओं के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति का अगला चरण माना जा रहा है। आने वाले समय में एएनटीएफ की बढ़ी हुई ताकत से प्रदेश में अवैध नशे के कारोबार पर लगाम कसने और दोषियों को कानून के शिकंजे में लाने की कार्रवाई और तेज होने की उम्मीद है।