सोसायटी में कुत्ते के पेशाब पर खौला बुज़ुर्गों का खून !
सोसायटियों में ‘डॉग-वॉक’ का बढ़ता विवाद
नियम, संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व की चुनौती
NEWS1UP
डेस्क रिपोर्ट
बेंगलुरु के वार्थुर स्थित एक हाई-राइज अपार्टमेंट में पालतू कुत्ते को घुमाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। घटना ने न सिर्फ अपार्टमेंट की शांति भंग की, बल्कि देशभर की सोसायटियों में बढ़ते “डॉग-वॉक विवाद” के उस बड़े सवाल को भी सामने ला दिया, जहां पालतू जानवरों के अधिकार, निवासियों की असुविधा और सोसायटी के नियम अक्सर टकरा जाते हैं।
मामला वार्थुर स्थित ब्रिगेड यूटोपिया ईस्ट एंटोपिया अपार्टमेंट का है। यहां रहने वाले तरुण अरोड़ा अपने पालतू कुत्ते को टहलाने निकले थे। आरोप है कि वह कुत्ते को उस वॉकिंग-एंड-एक्सरसाइज जोन के पास ले आए, जिसे खास तौर पर बुजुर्गों के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं कुत्ते के पेशाब करने को लेकर कुछ बुजुर्गों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद कहासुनी शुरू हो गई।
कुछ ही मिनटों में बहस धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले तीखी बहस हुई और फिर दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बुजुर्गों और युवक के बीच मारपीट साफ दिखाई दे रही है।
दो पक्ष, दो आरोप

तरुण अरोड़ा का आरोप है कि सात-आठ बुजुर्गों ने मिलकर उन पर हमला किया और लात-घूंसों से पीटा। वहीं बुजुर्गों के समूह की एक महिला ने भी पुलिस में काउंटर शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि जब उन्होंने कुत्ते के पेशाब करने पर सवाल उठाया तो अरोड़ा ने उन्हें धमकाया और हमला किया।
महिला का यह भी कहना है कि इस घटना के बाद वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं और उन्होंने पुलिस सुरक्षा की मांग की है। फिलहाल वार्थुर पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सोसायटियों में क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे विवाद ?
यह घटना केवल एक झड़प नहीं है, बल्कि शहरी सोसायटियों में तेजी से उभरते उस तनाव का संकेत है जहां पालतू जानवर रखने वाले निवासी और उनसे असहज लोग आमने-सामने आ जाते हैं।
बड़ी हाउसिंग सोसायटियों में अक्सर ये विवाद इन कारणों से बढ़ते देखे जा रहे हैं-
डॉग-वॉक के लिए निर्धारित जगह को लेकर विवाद
कुत्तों के मल-मूत्र की सफाई को लेकर शिकायतें
बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर डर
सोसायटी नियमों की अस्पष्टता या मनमानी व्याख्या
कई मामलों में यह भी देखा गया है कि सोसायटी के कुछ निवासी पालतू जानवरों के प्रवेश पर अनौपचारिक रोक लगाने की कोशिश करते हैं, जबकि पशु अधिकार कानून इसके खिलाफ हैं।
कानून क्या कहता है
एक पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार भारत में कोई भी हाउसिंग सोसायटी पालतू जानवर रखने या उन्हें परिसर में घुमाने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा सकती। हालांकि मालिक की जिम्मेदारी होती है कि वह कुत्ते के मल-मूत्र की सफाई करे और दूसरों को असुविधा न होने दे।
