हाई-राइज के भीतर ‘छोटा तंत्र’! शालीमार सिटी में पूर्व AOA बोर्ड पर कड़ी कार्रवाई !

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डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश पर हुई बैठक में ऑडिट रिपोर्ट पर तीखी बहस, छह साल का चुनावी प्रतिबंध और FIR की तैयारी

NEWS1UP

एओए/आरडब्लूए डेस्क

गाजियाबाद। देश में बड़े घोटालों और सत्ता के गलियारों में भ्रष्टाचार की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती रही हैं, लेकिन अब इसकी आहट उन आवासीय सोसाइटीयों तक भी साफ सुनाई देने लगी है, जिनके ड्राइंग रूम्स में बैठकर लोग इन बड़े घोटालों की निंदा किया करते हैं। और सार्वजानिक पदों पर बैठे लोगों के भ्रष्टाचार को कोसा करते हैं। विडंबना देखिये कि लोकतंत्र की सबसे छोटी यूनिट आवासीय सोसाइटी में से ही लोग थोड़ा बहुत पद और ताक़त पा लेने के बाद उसी भ्रष्टाचार का मिनिएचर  अपनी ही सोसायटी में कर देते हैं। और यह भी ध्यान नहीं रखते कि जिन कथित भ्रष्टाचारी नेताओं और अफसरों को वो कोसा करते हैं वे कम से कम अपने निवास स्थान को तो नहीं लूटा करते।

हकीकत यह है कि कई सोसाइटीयों में प्रबंधन के नाम पर कुछ लोग वर्षों तक अपना ‘छोटा तंत्र’ खड़ा कर लेते हैं और आर्थिक तथा प्रशासनिक फैसलों पर उनका ऐसा कब्जा हो जाता है कि आम निवासी केवल दर्शक बनकर रह जाते हैं।

कुछ ऐसा ही मामला टीला मोड़ थाना क्षेत्र के गरिमा गार्डन स्थित शालीमार सिटी अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन में सामने आया है, जहाँ रविवार को क्लब हाउस में आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग में पूर्व बोर्ड के कार्यकाल से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं को लेकर निवासियों का गुस्सा खुलकर सामने आया।

आमसभा में पेश जांच रिपोर्ट में कथित गड़बड़ियों और वित्तीय अव्यवस्था का हवाला देते हुए सदन ने पूर्व बोर्ड के सभी सदस्यों पर छह साल तक किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इसके साथ ही उनकी सदस्यता समाप्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का भी फैसला लिया गया।

बैठक में यह भी सामने आया कि सोसाइटी के बिजली बिलों की बकाया राशि को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आमसभा ने तय किया कि इस बकाया भुगतान की जिम्मेदारी पूर्व बोर्ड के पदाधिकारियों से वसूली के जरिए पूरी की जाएगी।

जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सचिव के कार्यकाल के दौरान हुए वित्तीय नुकसान का उल्लेख करते हुए आमसभा ने उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर उनसे रिकवरी करने का भी प्रस्ताव पारित किया। इस बीच बिल्डर कंपनी एम.आर. प्रोव्यू रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड के पास जमा निवासियों के आईएफएमएस फंड को वापस लेने का प्रस्ताव भी आमसभा में मंजूर किया गया।

बैठक का सबसे अहम निर्णय यह रहा कि जांच रिपोर्ट में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर संबंधित पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके लिए सोसाइटी निवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही जिलाधिकारी से मुलाकात करेगा।

वर्तमान बोर्ड के अध्यक्ष जय शंकर राय और संरक्षक विपिन कुमार डागर ने बताया कि आमसभा की कार्यवाही और पारित प्रस्तावों के मिनट्स शीघ्र ही डिप्टी रजिस्ट्रार को भेजे जाएंगे, ताकि मामले में वैधानिक कार्रवाई आगे बढ़ सके।

वहीं इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सचिव आर.के. मिश्रा ने कहा कि वह भी अपना पक्ष डिप्टी रजिस्ट्रार के समक्ष रखेंगे। मिश्रा के अनुसार, मामले से जुड़े तथ्यों को वह संबंधित प्राधिकारी के सामने स्पष्ट करेंगे। उन्होंने ऑडिट रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। 

दरअसल, तेजी से फैलती ‘हाई-राइज सोसाइटी संस्कृति’ के बीच अब यह सवाल खुलकर उठने लगा है कि क्या इन बहुमंजिला आवासीय परिसरों में प्रबंधन सचमुच पारदर्शी और जवाबदेह है, या फिर कुछ चुनिंदा लोग सोसाइटी के संसाधनों और फैसलों पर स्थायी कब्जा जमाकर बैठे हैं। जिन सोसाइटियों को आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित जीवन का प्रतीक माना जाता है, वहीं अगर वित्तीय अनियमितताओं और मनमानी के आरोप बार-बार सामने आने लगें तो यह पूरी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

शालीमार सिटी की GBM पारित कड़े प्रस्ताव दरअसल उसी बढ़ते असंतोष की गूंज हैं। यह साफ संकेत है कि अब निवासी केवल मूकदर्शक बने रहने को तैयार नहीं हैं। सोसाइटी प्रबंधन के नाम पर चल रही बंद कमरों की कार्यप्रणाली और आर्थिक अपारदर्शिता को अब खुली आमसभाओं में चुनौती दी जा रही है, और जवाबदेही तय करने की मांग भी उतनी ही तीखी हो चुकी है।

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