EV चार्जिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र-यूपी सरकार और नोएडा की सोसाइटी को नोटिस!
NEWS 1 UP February 27, 2026 0
निजी पार्किंग में चार्जर लगाने का अधिकार या सोसाइटी प्रबंधन की मनमानी ?
देशभर की सोसाइटियों के लिए मिसाल बन सकता है आने वाला फैसला!
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भूमेश शर्मा
नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा। इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर सरकार की नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच खाई अब न्यायपालिका के दरवाजे तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा की एक हाउसिंग सोसाइटी को नोटिस जारी किया है। मामला 13 अप्रैल को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जस्टिस बागची की पीठ ने यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 17 सितंबर 2024 को जारी EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर गाइडलाइंस को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा।
ग्रेटर नोएडा से उठी चिंगारी

याचिका ग्रेटर नोएडा स्थित निराला एस्टेट फेज-3 के निवासी रचित कत्याल ने दायर की है। उनका कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के बाद उन्होंने अपनी निर्धारित पार्किंग में अपने खर्च पर प्रमाणित EV चार्जिंग यूनिट लगाने के लिए 26 मई 2025 को NOC मांगा था। उन्होंने आश्वस्त किया था कि इंस्टॉलेशन सभी सुरक्षा और विद्युत मानकों के अनुरूप होगा।
लेकिन मई से दिसंबर 2025 के बीच कई पत्राचार और रिमाइंडर के बावजूद अनुमति नहीं मिली। सोसाइटी प्रबंधन ने यह दलील दी कि परिसर में पहले से कुछ चार्जिंग पॉइंट मौजूद हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि करीब 4,000 फ्लैट्स और 56 इलेक्ट्रिक गाड़ियों वाली सोसाइटी में केवल दो चार्जिंग पॉइंट (7 kW और 3 kW) हैं, जो नाकाफी हैं और सभी के लिए सुलभ नहीं।
2024 की गाइडलाइंस क्या कहती हैं ?
मिनिस्ट्री ऑफ पॉवर द्वारा जारी 2024 गाइडलाइंस के प्रमुख बिंदु:
EV चार्जिंग स्टेशन लगाना और चलाना डी-लाइसेंस्ड एक्टिविटी है।
कोई भी व्यक्ति अपनी आवंटित पार्किंग में सुरक्षा मानकों के साथ निजी चार्जर लगा सकता है।
बिजली सप्लाई मौजूदा मीटर या अलग सब-मीटर से दी जा सकती है।
150 kW तक का लो टेंशन (LT) कनेक्शन डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी को देना होगा।
राज्य नोडल एजेंसियां EV मांग का वार्षिक आकलन करेंगी।
गाइडलाइंस का उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना और आवासीय परिसरों में चार्जिंग की सुविधा सुनिश्चित करना है।
सुरक्षा मानकों का कानूनी आधार
याचिका में कहा गया है कि इंस्टॉलेशन प्रक्रिया केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के सेफ्टी और इलेक्ट्रिक सप्लाई रेगुलेशंस, 2023 के अनुरूप होती है। यानी उचित अर्थिंग, ओवरलोड प्रोटेक्शन, केबलिंग और फायर सेफ्टी मानकों का पालन अनिवार्य है।
इसके अलावा आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने मॉडल बिल्डिंग बाय-लॉज़ और शहरी एवं क्षेत्रीय विकास योजना निर्माण एवं कार्यान्वयन (URDPFI) गाइडलाइंस में संशोधन कर नई इमारतों में EV चार्जिंग के लिए प्रावधान जोड़े हैं।
मौलिक अधिकारों का सवाल
याचिकाकर्ता का दावा है कि गाइडलाइंस लागू न करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 के तहत समानता और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। उनका तर्क है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना पर्यावरणीय दायित्वों से जुड़ा विषय है, और इसमें बाधा डालना व्यापक जनहित के खिलाफ है।
महाराष्ट्र मॉडल का हवाला
याचिका में महाराष्ट्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वहां हाउसिंग सोसाइटियों को सात दिनों के भीतर EV चार्जर के लिए NOC जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह की स्पष्ट और बाध्यकारी व्यवस्था पूरे देश में लागू करने की मांग की गई है।
हाईराइज सोसाइटियों में बढ़ता विवाद

देशभर की हाईराइज सोसाइटियों में EV चार्जिंग को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं। एक तरफ जहाँ बेसमेंट में फायर सेफ्टी का खतरा, ट्रांसफॉर्मर पर अतिरिक्त लोड, कॉमन एरिया के उपयोग को लेकर विवाद सामने आते रहते हैं वहीँ दूसरी तरफ एकरूप नीति का अभाव भी देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या कानून की कमी नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन की अस्पष्टता है। यदि स्पष्ट नियामक फ्रेमवर्क और समयसीमा तय हो जाए, तो अधिकांश विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं।
अदालत से मांगी गई राहत
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि:
2024 की EV चार्जिंग गाइडलाइंस को सभी राज्यों में प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया जाए।
जब तक उत्तर प्रदेश में स्पष्ट कानून न बने, तब तक संबंधित सोसाइटी को उनकी पार्किंग में निजी चार्जर लगाने की अनुमति या NOC जारी करने का आदेश दिया जाए।
केंद्र सरकार को एक विस्तृत और बाध्यकारी नियामक फ्रेमवर्क नोटिफाई करने का निर्देश दिया जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रीराम परक्कट और सुभाष चौधरी ने पैरवी की।
