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डेस्क
गाजियाबाद। नगर निगम द्वारा बढ़ाए गए हाउस टैक्स के खिलाफ दायर याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट से गृहकर दाताओं को फिलहाल निराशा हाथ लगी है। कुछ दिन पूर्व सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया था। अब जानकारी मिली है कि निगम की टैक्स वृद्धि के विरुद्ध दायर याचिका को खारिज कर दिया गया है। हालांकि विस्तृत आदेश की प्रति अभी उपलब्ध नहीं हो पाई है, जिसके बाद ही कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
याचिकाकर्ता टीम के सदस्य और पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल ने कहा कि जब तक आदेश की प्रमाणित कॉपी प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि यदि निर्णय पूरी तरह निगम के पक्ष में जाता है तो यह आम करदाताओं के साथ न्यायसंगत नहीं माना जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि अन्य याचिकाकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
नाटकीय मोड़ों से गुजरा पूरा प्रकरण
हाउस टैक्स बढ़ोतरी का यह मामला शुरू से ही उतार-चढ़ाव भरा रहा। पहले नगर निगम द्वारा टैक्स दरों में वृद्धि की घोषणा की गई। इसके बाद एक बोर्ड बैठक में बढ़ी हुई दरों को वापस लेने की बात कही गई। लेकिन व्यवहारिक स्तर पर वसूली बढ़ी हुई दरों के अनुसार ही जारी रही।
इस स्थिति से असंतुष्ट पूर्व पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बढ़ी हुई दरों को चुनौती दी। इसी दौरान महापौर द्वारा 20 प्रतिशत की छूट की घोषणा भी की गई, जिससे मामला और उलझ गया।
जनता में असमंजस की स्थिति
पूरे घटनाक्रम के दौरान आम नागरिकों में असमंजस की स्थिति बनी रही। कई करदाता यह समझ नहीं पा रहे थे कि वे बढ़ी हुई दरों पर टैक्स जमा करें या न्यायालय के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा करें। अब याचिका खारिज होने की सूचना के बाद करदाताओं में निराशा देखी जा रही है। हालांकि अंतिम और विस्तृत आदेश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने किन आधारों पर याचिका को खारिज किया है और आगे अपील की क्या संभावनाएं हैं।
फिलहाल सभी की नजरें आदेश की कॉपी पर टिकी हैं, जिसके बाद यह तय होगा कि यह मामला यहीं समाप्त होगा या उच्च न्यायालय की किसी अन्य पीठ अथवा सर्वोच्च न्यायालय की ओर रुख किया जाएगा।