सिख समुदाय को बड़ी राहत: ‘आनंद विवाह’ पंजीकरण के लिए यूपी में नई नियमावली लागू
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कैबिनेट की मंजूरी के बाद ‘उत्तर प्रदेश आनंद विवाह रजिस्ट्रेशन नियमावली-2026’ लागू, तहसील से राज्य स्तर तक बनाए जाएंगे रजिस्ट्रार
NEWS1UP
संवाददाता
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने सिख समुदाय के विवाह पंजीकरण को सरल और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में “उत्तर प्रदेश आनंद विवाह रजिस्ट्रेशन नियमावली-2026” को मंजूरी दे दी गई है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद सिख धर्म की परंपरागत ‘आनंद कारज’ विवाह प्रक्रिया का विधिवत पंजीकरण अब प्रदेश में आसान हो जाएगा।
सरकार के इस फैसले के पीछे Anand Marriage Act, 1909 (संशोधित 2012) की धारा-6 के तहत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकारों का आधार है। साथ ही यह निर्णय अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ व अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 4 सितम्बर 2025 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
तहसील से राज्य मुख्यालय तक बनेगी रजिस्ट्रार व्यवस्था
नई नियमावली के तहत विवाह पंजीकरण की बहुस्तरीय व्यवस्था तैयार की गई है। इसके अनुसार-
तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को रजिस्ट्रार नियुक्त किया जाएगा।
जनपद स्तर पर जिलाधिकारी जिला रजिस्ट्रार होंगे।
मंडल स्तर पर मंडलायुक्त मंडलीय रजिस्ट्रार के रूप में कार्य करेंगे।
राज्य मुख्यालय पर अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ निदेशक को मुख्य रजिस्ट्रार नामित किया जाएगा।
तीन महीने के भीतर कराना होगा पंजीकरण
नियमावली के मुताबिक ‘आनंद कारज’ से संपन्न विवाह के पक्षकार या उनके परिजन विवाह की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के साथ 1500 रुपये के न्यायालय शुल्क स्टाम्प जमा करना होगा।
यदि निर्धारित अवधि के बाद आवेदन किया जाता है तो नियमानुसार विलंब शुल्क भी देना होगा।
अपील की भी व्यवस्था
नई व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अपील का प्रावधान भी रखा गया है।
रजिस्ट्रार के आदेश से असंतुष्ट पक्ष जिला रजिस्ट्रार के समक्ष अपील कर सकेगा।
जिला रजिस्ट्रार के निर्णय के खिलाफ मंडलीय रजिस्ट्रार के पास दूसरी अपील का विकल्प होगा।
पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी
नियमावली में विवाह रजिस्टर के रख-रखाव, अभिलेखों के संरक्षण तथा उनकी प्रमाणित प्रति प्राप्त करने से जुड़े स्पष्ट प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से प्रदेश में सिख समुदाय के विवाहों का विधिवत रिकॉर्ड तैयार होगा और विवाह से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी व सरल बनेंगी।
नई नियमावली को सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक राहत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पारंपरिक ‘आनंद कारज’ विवाह को कानूनी पहचान दिलाने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक व्यवस्थित और सुलभ हो जाएगी।
