हमारी कौम पर अत्याचार… हम कब तक चुप रहेंगे !
भड़काऊ चैट से खुला नाहल का ‘व्हाट्सऐप जिहाद’ नेटवर्क
मौलाना, वकील और कानून छात्र समेत 6 गिरफ्तार
NEWS1UP
क्राइम डेस्क
गाजियाबाद। मसूरी थाना क्षेत्र का नाहल गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब एक साल पहले यही गांव उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना था, जब 25 मई 2025 की रात हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया था और नोएडा पुलिस के सिपाही सौरभ देशवाल की मौत हो गई थी। उस घटना ने कानून-व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे।
अब उसी गांव से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गाजियाबाद पुलिस ने गुरुवार को यहां एक ऐसे व्हाट्सऐप नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें युवाओं को संवेदनशील धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों के नाम पर भड़काने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी सामग्री साझा करने का आरोप सामने आया है।
पुलिस ने इस मामले में मौलाना, वकील और कानून के छात्र समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पुरानी हिंसक घटना की छाया में नई जांच
नाहल गांव पहले ही सुरक्षा एजेंसियों की नजर में था। 25 मई 2025 की रात नोएडा पुलिस की टीम हिस्ट्रीशीटर कादिर को पकड़ने के लिए गांव पहुंची थी। इसी दौरान पुलिस टीम पर अचानक पथराव और फायरिंग शुरू हो गई। हमले में नोएडा पुलिस के सिपाही सौरभ देशवाल गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनकी बाद में मौत हो गई। उस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था और पुलिस को गांव में बड़े स्तर पर कार्रवाई करनी पड़ी थी।
अब नई जांच में सामने आए व्हाट्सऐप नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं गांव में कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने की कोशिश तो नहीं की जा रही थी।
भड़काऊ चैट से खुला नेटवर्क
पुलिस के हाथ लगे मोबाइल फोन की जांच में कुछ ऐसी चैट सामने आई हैं, जिनमें समुदाय के नाम पर युवाओं को भड़काने की कोशिश की जा रही थी।
एक संदेश में लिखा गया था –
“हमारी कौम पर अत्याचार हो रहे हैं, बाबरी मस्जिद हमसे छीन ली गई… हम कब तक चुप रहेंगे।”
जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे संदेशों का उद्देश्य युवाओं में असंतोष पैदा करना और उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर मोड़ना था।

यूट्यूब से व्हाट्सऐप तक फैलाया नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी सावेज ने बताया कि वह यूट्यूब पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी वीडियो देखता था। इसके बाद उसने एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया और इन वीडियो तथा लिंक को युवाओं तक पहुंचाना शुरू किया।
पुलिस के अनुसार ग्रुप में केवल उन्हीं लोगों को जोड़ा जाता था जो इस तरह के संदेशों को पसंद करते थे और “कौम के लिए समर्पित” बताए जाते थे।
मस्जिद के बाहर बैठकों में होती थी चर्चा
जांच में यह भी सामने आया है कि गांव की मस्जिद के बाहर शाम के समय कुछ युवक इकट्ठा होते थे। नमाज से पहले होने वाली इन बैठकों में बाबरी मस्जिद और कश्मीर जैसे मुद्दों पर चर्चा होती थी।
पुलिस का आरोप है कि इन चर्चाओं के दौरान कुछ लोग युवाओं को भड़काने वाली बातें करते थे।
छापेमारी कर छह आरोपी गिरफ्तार
12 मार्च को एडिशनल डीसीपी लिपि नागायच के नेतृत्व में मसूरी थाना पुलिस ने इंस्पेक्टर अजय चौधरी के साथ नाहल गांव में छापा मारा। इस दौरान पुलिस ने सावेज, जुनैद, फरदीन, इकराम अली, फजरु और जावेद को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी का मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है, जिसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
पुलिस के अनुसार सावेज उम्र 20 किराना दुकान चलाता है, पुलिस के अनुसार वही ग्रुप का मुख्य संचालक था। जुनैद (23) एलएलबी का छात्र है, सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी सामग्री को लाइक और शेयर करता था। फरदीन (22) मजदूरी करता है, गांव में बैठकों के लिए लोगों को बुलाता था। इकराम अली (36) गाजियाबाद कचहरी में वकील, करीब ढाई महीने पहले ग्रुप से जुड़ा। फजरु (48) मजदूरी करता है, बैठकों में नियमित रूप से शामिल होता था। जावेद (45) गांव की मस्जिद का मौलाना, पुलिस के अनुसार ग्रुप में सामग्री साझा करता था।
बांग्लादेश कनेक्शन की भी जांच
पुलिस अब इस मामले के संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक आरोपी इकराम अली की मां मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली बताई जा रही है। हालांकि इस पहलू की अभी जांच जारी है।
