यूजीसी रोलबैक की मांग पर 8 मार्च को ‘जन सामान्य मंच’ की दिल्ली घेरने की तैयारी !

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यूजीसी कानून के खिलाफ देशभर में उबाल

वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा, पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री समेत कई प्रमुख चेहरे होंगे शामिल

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

नई दिल्ली। उच्च शिक्षा से जुड़े नए यूजीसी कानून के विरोध में देशभर में उबाल देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में 8 मार्च को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसकी तैयारियां तेज हो गई हैं। आंदोलन को राष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने मिलकर “जन सामान्य मंच” का गठन किया है। मंच के बैनर तले देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं।

आयोजकों के अनुसार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो चुके हैं। प्रदर्शन में भाग लेने के लिए लोग ट्रेन, बस और अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल कर दिल्ली पहुंच रहे हैं। कई जगहों से जत्थों और काफिलों के रूप में लोग निकल रहे हैं, जहां प्रदर्शनकारी “यूजीसी रोलबैक दिल्ली”, “यूजीसी का कानून वापस लो” और “जातिवादी विधान समाप्त करो” जैसे नारों के साथ राजधानी की ओर बढ़ रहे हैं।

इस आंदोलन में कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल होने जा रही हैं। इनमें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा, उत्तर प्रदेश के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री और सवर्ण आर्मी प्रमुख सर्वेश पांडेय जैसे नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इसके अलावा चाणक्य सेना, विभिन्न क्षत्रिय महासभाएं, करणी सेना और कई वैश्य महासभाओं ने भी आंदोलन में भाग लेने की घोषणा की है।

आयोजकों का कहना है कि 8 मार्च को जंतर-मंतर पर होने वाला यह प्रदर्शन देशभर में बढ़ रहे असंतोष की आवाज बनेगा और सरकार से यूजीसी कानून को वापस लेने की मांग जोरदार तरीके से उठाई जाएगी।

जनता की आवाज को नजरअंदाज नहीं कर सकती सरकार

इसी बीच अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद (हरित प्रांत, उत्तर प्रदेश) के अध्यक्ष प्रकाश चंद शर्मा ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए सरकार से कानून वापस लेने की मांग की है।

प्रकाश चंद शर्मा

 प्रकाश चंद शर्मा ने कहा-

“यूजीसी का यह कानून शिक्षा व्यवस्था को संतुलित करने के बजाय समाज में नए प्रकार का भेदभाव पैदा करने वाला है। देशभर में लोग इसके विरोध में एकजुट हो रहे हैं। हम सरकार से साफ कहना चाहते हैं कि जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस कानून को तत्काल वापस लिया जाए। यदि सरकार ने इसे वापस नहीं लिया तो 8 मार्च को जंतर-मंतर से उठने वाली यह आवाज पूरे देश में एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले लेगी।”

उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदायों का एक मंच पर आना यह दर्शाता है कि यह मुद्दा अब राष्ट्रीय जनभावना से जुड़ चुका है।

8 मार्च को जंतर-मंतर बनेगा आंदोलन का केंद्र

आयोजकों का दावा है कि 8 मार्च को जंतर-मंतर पर हजारों लोग एकत्र होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे। इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में प्रशासन भी सतर्क हो गया है।

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