हाउस टैक्स की ‘बेतहाशा बढ़ोतरी’ पर गाजियाबाद में बगावत, आमरण अनशन पर बैठे अवधेश शर्मा !

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हाई कोर्ट में याचिका निरस्त होने के बाद भी नहीं थमा विवाद

300–400% बढ़ोतरी के खिलाफ नवयुग मार्केट के आंबेडकर पार्क से आंदोलन का बिगुल

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद। शहर में हाउस टैक्स की कथित बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर चल रहा विवाद अब सड़क से सीधे आमरण अनशन तक पहुंच गया है। हाई कोर्ट में याचिका निरस्त होने के बावजूद इस मुद्दे की आग ठंडी पड़ती नहीं दिख रही। इसी के विरोध में व्यापार मंडल के अध्यक्ष अवधेश शर्मा ने गुरुवार से नवयुग मार्केट स्थित आंबेडकर पार्क में आमरण अनशन शुरू कर दिया।

आमरण अनशन पर बैठे अवधेश शर्मा

अनशन के पहले दिन ही उन्होंने नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला। आमरण अनशन पर बैठे अवधेश शर्मा ने कहा कि जब सत्ता और शासन दोनों से निराशा हाथ लगे तो किसी न किसी को आम जनता के हक की लड़ाई के लिए आगे आना ही पड़ता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन ने हाउस टैक्स में 300 से 400 प्रतिशत तक की भारी-भरकम बढ़ोतरी कर दी, जिससे शहर के व्यापारी और आम नागरिक दोनों परेशान हैं। शर्मा ने कहा कि बाद में जनप्रतिनिधियों ने बढ़ोतरी वापस लेने की घोषणा जरूर की, लेकिन यह केवल दिखावटी कदम साबित हुआ।

शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि यह जनता के साथ छल की पुरानी चाल है। उनके मुताबिक नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधि आमजन के साथ “पिंग-पोंग का खेल” खेल रहे हैं, जिसमें जनता केवल गेंद बनकर रह गई है।

दरअसल, गाजियाबाद में हाउस टैक्स में कथित अत्यधिक बढ़ोतरी का विवाद पिछले करीब दस महीनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। यह मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश स्तर तक चर्चा का विषय बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

इस बीच, अनशन के पहले ही दिन आंदोलन को व्यापारिक संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल ने अवधेश शर्मा के आमरण अनशन को खुला समर्थन दिया। संगठन के महानगर अध्यक्ष ओम दत्त गुप्ता ने अनशन स्थल पर पहुंचकर उन्हें अपने बैनर का औपचारिक समर्थन पत्र सौंपा।

अनशन स्थल पर समर्थन देने पहुंचे लोगों में सामाजिक कार्यकर्ता भूपेंद्र नाथ, राजीव अग्रवाल, प्रीतम लाल और आर.के. आर्य प्रमुख रूप से शामिल रहे। शहर के व्यापारिक और सामाजिक संगठनों की बढ़ती मौजूदगी के बीच यह आंदोलन अब एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।

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