देविका स्काइपर्स में व्यवस्थाएं पटरी पर, मगर IFMS और कम्प्लीशन सर्टिफिकेट पर अब भी सवाल !

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तीन साल की कानूनी जंग के बाद AOA को मेंटेनेंस, लेकिन बिल्डर की अधूरी जिम्मेदारियों और प्राधिकरण की देरी पर उठ रहे सवाल

NEWS1UP

एओए/आरडब्लूए डेस्क

गाजियाबाद। करीब तीन वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई, हाईकोर्ट में लगातार पैरवी और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) से कई दौर की बैठकों के बाद आखिरकार 24 जनवरी से राजनगर एक्सटेंशन की देविका स्काइपर्स सोसाइटी का मेंटेनेंस आधिकारिक रूप से अपार्टमेंट ओनर एसोसिएशन (AOA) को सौंप दिया गया। यह सोसाइटी के फ्लैट मालिकों के लंबे संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है।

मेंटिनेंस का अधिकार मिलने पर खुशी जताते एओए के पदाधिकारी एवं निवासीगण (फाइल फोटो)

मेंटेनेंस का जिम्मा मिलते ही AOA ने सोसाइटी की मूलभूत सुविधाओं को सुधारने का काम शुरू कर दिया। बिजली स्टाफ और सफाई कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था की गई, सफाई और बिजली से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से ठीक कराया गया तथा जरूरी सिविल कार्यों के साथ मरम्मत और पेंटिंग का काम भी शुरू कर दिया गया। इसके चलते सोसाइटी की व्यवस्थाओं में धीरे-धीरे सुधार दिखाई देने लगा है।

मेंटिनेंस मिलते शुरू होते सुधार कार्य

हालांकि मेंटेनेंस का यह हस्तांतरण अभी भी अधूरा माना जा रहा है। फ्लैट मालिकों के मन में यह चिंता बनी हुई है कि कहीं बिल्डर अपने बाकी दायित्वों से बच न निकले। निवासियों के अनुसार IFMS की राशि, कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, विभिन्न विभागों की अनिवार्य NOC और सोसाइटी से जुड़े अन्य कानूनी दस्तावेज अब भी बिल्डर के पास लंबित हैं।

सुधार कार्यों के साथ-साथ सौन्दर्यकरण पर फोकस

AOA के अध्यक्ष अजय सैनी का कहना है कि-

अजय सैनी

बिल्डर ने फ्लैट खरीदारों के साथ धोखा किया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट में लंबी लड़ाई और लगातार दबाव के बाद ही GDA को हस्तक्षेप करना पड़ा। उनके अनुसार केवल मेंटेनेंस का अधिकार मिलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बिल्डर से सभी जरूरी दस्तावेज और IFMS की राशि दिलाना भी उतना ही जरूरी है।

उल्लेखनीय है कि 12 फरवरी को GDA ने बिल्डर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 और 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। इसके बावजूद निवासी यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि प्राधिकरण समय रहते बिल्डर और डेवलपर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता, तो फ्लैट मालिकों को वर्षों तक इस तरह की परेशानी का सामना क्यों करना पड़ता।

इन सबके बीच सोसाइटी के निवासियों को उम्मीद है कि AOA के प्रयासों और सामूहिक सहयोग से देविका स्काइपर की व्यवस्थाएं अब लगातार बेहतर होंगी और भविष्य में सोसाइटी एक व्यवस्थित और आदर्श आवासीय परिसर के रूप में अपनी पहचान बना सकेगी।

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