बालमुकुंद AOA चुनाव पर बवाल: अध्यक्ष के आरोपों के बाद निवासियों का तीखा पलटवार!
चुनाव अधिकारी पर पक्षपात का आरोप
24 घंटे में पलटा घटनाक्रम
निवासियों ने भेजा प्रतिवाद पत्र
NEWS1UP
एओए/आरडब्लूए डेस्क
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित बाल मुकुंद सोसाइटी में अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) चुनाव को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। कालातीत अध्यक्ष द्वारा नामित चुनाव अधिकारी पर साजिश रचने का आरोप लगाए जाने के एक दिन बाद ही निवासियों के एक समूह ने डिप्टी रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर तीखा पलटवार किया है।

अध्यक्ष ने लगाया था साजिश का आरोप
सूत्रों के अनुसार, कार्यकारी AOA अध्यक्ष शबनम खान ने डिप्टी रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि नियुक्त चुनाव अधिकारी एक पक्ष विशेष को चुनाव जिताने के उद्देश्य से कथित रूप से साजिश कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए चुनाव अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा (जिला मलेरिया अधिकारी) को बदलने की की मांग की थी। यहाँ गौरतलब बात यह है कि पहले ही दो बार चुनाव अधिकारी बदले जा चुके हैं।
निवासियों का खंडन, बताया ‘भ्रामक प्रयास’
इसके अगले ही दिन कुछ निवासियों ने संयुक्त रूप से पत्र भेजकर इन आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पहले से घोषित कार्यक्रम के अनुसार चल रही है और उसे विवादित बनाकर विलंबित करने का प्रयास किया जा रहा है। सोसाइटी निवासियों रोहित दीक्षित, शोभित मित्तल, अशोक चौधरी, विकास पंडित, राजेश गुप्ता, शरद गर्ग और मोहित वशिष्ठ के साथ लगभग 50 लोगों ने डिप्टी रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर चुनाव अधिकारी न बदलने की मांग की है।
कार्यकाल समाप्ति के बाद भी संचालन पर सवाल
पत्र में उल्लेख किया गया है कि AOA का कार्यकाल 19 अगस्त 2025 को समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद सोसायटी के प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर मतभेद जारी हैं। निवासियों ने आरोप लगाया कि कार्यालय अभिलेखों, मेंटेनेंस व्यवस्था और बैंक खाते के संचालन को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
बैंक लेनदेन को लेकर भी आरोप
कार्यवाहक सचिव के द्वारा शिकायत में बैंक खाते से कथित अनियमित लेनदेन और हस्ताक्षर जालसाजी के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
व्हाट्सएप पोल का हवाला
निवासियों का दावा है कि सोसायटी के व्हाट्सएप समूह में कराए गए पोल में चुनाव अधिकारी को हटाने के प्रस्ताव को एक भी समर्थन नहीं मिला। इसका स्क्रीनशॉट भी पत्र के साथ संलग्न किया गया है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच अब नजरें डिप्टी रजिस्ट्रार के निर्णय पर टिकी हैं। सोसायटी के सदस्य शीघ्र निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की मांग कर रहे हैं ताकि विवाद का समाधान हो सके और प्रशासनिक स्थिरता बहाल हो।
