प्रदर्शन, दबाव और प्रशासन: क्यों विवादों में रहे ‘गुलमोहर गार्डन’ के एओए चुनाव ?

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मॉडल बायलॉज ने सेकंड ओनर्स की उम्मीदों पर फेरा पानी

निष्पक्ष चुनाव को लेकर निगरानी और स्याही की मांग

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित गुलमोहर गार्डन सोसाइटी में अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के चुनाव बीते कई सप्ताह से विवादों के केंद्र में बने हुए हैं। 8 दिसंबर को मौजूदा एओए का कार्यकाल समाप्त हो जाने के बावजूद अब तक नए चुनाव न कराए जाने से असंतोष गहराता गया, जो समय के साथ प्रदर्शन, आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक दखल तक पहुँच गया।

सोसाइटी निवासियों का आरोप है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी कालातीत एओए बोर्ड द्वारा निर्णय लिए जाते रहे, जिससे पारदर्शिता और वैधानिकता पर सवाल खड़े हुए। इसी मुद्दे को लेकर सोसाइटी परिसर के भीतर कई बार विरोध प्रदर्शन हुए, वहीं कुछ निवासियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से भी हस्तक्षेप की मांग की।

चुनाव प्रक्रिया बनी विवाद की जड़

विवाद की सबसे बड़ी वजह चुनाव प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता का अभाव रहा। वोटर लिस्ट, मतदान के अधिकार और चुनाव की तारीख तय न होने से रेजीडेंट्स के बीच भ्रम और अविश्वास की स्थिति बनी। कई निवासियों का कहना है कि पहले हुए चुनावों में नियमों की अनदेखी हुई, जिससे नतीजों पर सवाल उठे।

इसी पृष्ठभूमि में नामित चुनाव अधिकारी डॉ. राजेश तेवतिया की नियुक्ति की गई। 23 जनवरी को उन्होंने कालातीत एओए बोर्ड और रेजीडेंट्स के साथ बैठक कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। बैठक में संशोधित वोटर लिस्ट और डीड ऑफ डिक्लेरेशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

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कानून ने खींची लक्ष्मण रेखा

चुनाव अधिकारी ने साफ किया कि उत्तर प्रदेश में लागू मॉडल बायलॉज के अनुसार केवल फर्स्ट ओनर को ही मतदान का अधिकार है। फर्स्ट ओनर के निधन की स्थिति में ही सेकंड ओनर वोट डाल सकता है। इस स्पष्टिकरण के बाद कई निवासियों की आपत्तियाँ सामने आईं, क्योंकि बड़ी संख्या में फ्लैट सेकंड ओनर या पारिवारिक सदस्यों के नाम पर संचालित हैं।

डॉ. तेवतिया के अनुसार यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि सोसाइटी के प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय संपत्ति के वैध स्वामियों द्वारा ही लिए जाएँ और भविष्य में कानूनी विवाद न उत्पन्न हों।

वेटेज सिस्टम से होगी वोटों की गिनती

वोटों की गिनती वेटेज सिस्टम से होगी। इस व्यवस्था के तहत हर फ्लैट का वोट उसके सुपर एरिया या निर्धारित अनुपात के अनुसार मूल्यवान होगा। इसके लिए डीड ऑफ़ डेक्लेरेशन मांगी गई है।

18 सूत्री ज्ञापन और निष्पक्षता की मांग

इसी बीच रेजीडेंट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव अधिकारी को 18 बिंदुओं का ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की मांग की। ज्ञापन में मतदान कक्ष में प्रत्याशी के प्रतिनिधि की उपस्थिति, वोटर की उंगली पर स्याही, सख्त पहचान सत्यापन, मतदान की निर्बाध वीडियो रिकॉर्डिंग, नामांकन शुल्क न्यूनतम रखने और बैलेट से वोट शेयर के सटीक मिलान जैसे बिंदु शामिल हैं।

सोसाइटी निवासी अवधेश मित्तल का कहना है कि “यदि इस बार भी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही, तो विवाद और गहराएगा।”

प्रशासन पर बढ़ता दबाव

लगातार प्रदर्शन और शिकायतों के चलते प्रशासन पर समयबद्ध चुनाव कराने का दबाव बढ़ता गया। चुनाव अधिकारी ने भरोसा दिलाया है कि जैसे ही सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे हो जाएंगे, फरवरी के मध्य तक एओए चुनाव संपन्न करा दिए जाएंगे।

नज़रें अब फरवरी पर

गुलमोहर गार्डन में एओए चुनाव केवल एक एक इंटरनल प्रोसेस नहीं रह गया है बल्कि यह सवाल बन गया है कि क्या कानून, प्रशासन और रेजीडेंट्स के बीच संतुलन बन पाएगा। अब सभी की निगाहें फरवरी पर टिकी हैं, जहाँ यह तय होगा कि प्रदर्शन और दबाव के बीच लोकतांत्रिक प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष साबित होती है।

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