एनसीआर में हैंडओवर की जटिलताओं के बीच ‘स्कार्डी ग्रीन’ बनी मिसाल !

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पारदर्शी प्रक्रिया से बिल्डर ने एओए को सौंपा पूरा प्रबंधन

निवासियों में संतोष

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। एनसीआर की हाईराइज सोसाइटियों में बिल्डर से हैंडओवर लेना अक्सर एक जटिल और विवादास्पद प्रक्रिया साबित होती रही है। गाजियाबाद, नोएडा समेत पूरे क्षेत्र में यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई मामलों में बिल्डर या तो हैंडओवर देने से बचते हैं या फिर बिना कानूनी औपचारिकताओं के अधूरा हैंडओवर थोपकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होने की कोशिश करते हैं। इतना ही नहीं, कई जगहों पर बिल्डर और एओए पदाधिकारियों की मिलीभगत से बिना सीसी, ओसी, आईएफएमएस फंड, स्वीकृत नक्शों और जरूरी एनओसी के ही हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है।

अनियमितताओं पर जीडीए को दर्ज करानी पड़ी एफआईआर

हाल के महीनों में राजनगर एक्सटेंशन की कुछ सोसाइटियों में हैंडओवर से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) को एफआईआर तक दर्ज करानी पड़ी है। इन मामलों ने साफ कर दिया है कि यदि हैंडओवर प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन न किया जाए तो भविष्य में निवासियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

स्कार्डी ग्रीन ने पेश की पारदर्शी हैंडओवर की मिसाल

इसी परिदृश्य के बीच एनएच-24 स्थित गोल्फ लिंक्स टाउनशिप की स्कार्डी ग्रीन सोसाइटी ने एक सुव्यवस्थित और पारदर्शी हैंडओवर प्रक्रिया पूरी कर एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। सोसाइटी में पहली फरवरी को एओए बोर्ड की ओर से जनरल बॉडी मीटिंग (जीबीएम) आयोजित की गई, जिसमें निवासियों के साथ हैंडओवर के सभी पहलुओं पर खुलकर चर्चा की गई। व्यापक संवाद और सहमति के बाद हैंडओवर के लिए एक विस्तृत एमओयू का मसौदा तैयार किया गया।

एमओयू हस्ताक्षर के साथ तय हुई मेंटीनेंस की जिम्मेदारी

इसके बाद पहली मार्च को स्कार्डी के निदेशकों और एओए के बीच औपचारिक रूप से एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत आगामी एक अप्रैल से सोसाइटी का मेंटीनेंस पूरी तरह एओए अपने हाथों में ले लेगी। पूरी प्रक्रिया में निवासियों की भागीदारी और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई।

आईएफएमएस समेत सभी कानूनी दस्तावेज एओए को सौंपे

इस हैंडओवर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि बिल्डर ने सोसाइटी को आईएफएमएस फंड की पूरी राशि, करीब पौने तीन करोड़ रुपये एओए को सौंप दी है। इसके अलावा रिपेयर और टूट-फूट से जुड़े कार्यों के लिए करीब साढ़े सोलह लाख रुपये अलग से दिए गए हैं।

एओए पदाधिकारियों को विधिवत हैंडओवर सौंपते स्कार्डी ग्रीन के निदेशक

स्कार्डी ग्रीन के निदेशक इंद्रजीत अरोड़ा, चन्दरजीत पाठक और ललित नारायण की उपस्थिति में सोसाइटी एओए अध्यक्ष राजकुमार शर्मा, सचिव आशीष कुमार, कोषाध्यक्ष गौरव सिंह और कार्यकारिणी सदस्य अजितेश चौहान को ओसी, सीसी, प्राधिकरण से स्वीकृत नक्शे, स्वीकृत पार्किंग लेआउट, पर्यावरण संबंधी एनओसी समेत सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही सोसाइटी को 16 गेस्ट पार्किंग और मंदिर निर्माण के लिए अतिरिक्त स्थान भी सौंपा गया है।

निवासियों की भावना के अनुरूप हुआ हैंडओवर : एओए

एओए अध्यक्ष राजकुमार शर्मा के अनुसार-

राजकुमार शर्मा, AOA अध्यक्ष

सोसाइटी के प्रत्येक निवासी की भावना और सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही बिल्डर से लगातार पारदर्शी और विधिसम्मत हैंडओवर की दिशा में प्रयास किए गए। बिल्डर का भी इस प्रक्रिया में सकारात्मक सहयोग मिला और निवासियों की सक्रिय भागीदारी के कारण यह प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सकी।

दूसरी सोसाइटियों में अब भी जारी विवाद

उल्लेखनीय है कि इसी टाउनशिप की एक अन्य सोसाइटी में आईएफएमएस फंड को लेकर अभी भी कानूनी लड़ाई चल रही है। वहीं टाउनशिप की और एक सोसाइटी की ऑडिट रिपोर्ट में यह सामने आया है कि शुरुआती एओए टीम के कुछ पदाधिकारियों की मिलीभगत से अवैध तरीके से हैंडओवर ले लिया गया था। परिणामस्वरूप न तो बिल्डर से आईएफएमएस फंड लिया गया और न ही सीसी, ओसी, स्वीकृत नक्शों और एनओसी जैसे जरूरी दस्तावेज हासिल किए गए।

होम बायर्स के अधिकार सर्वोपरि : बिल्डर प्रतिनिधि

स्कार्डी के जीएम (मेंटीनेंस) राहुल त्यागी का कहना है कि-

राहुल त्यागी, GM स्कार्डी

हैंडओवर प्रक्रिया के दौरान कंपनी की प्राथमिकता हमेशा होम बायर्स के अधिकार और उनकी सुविधा रही है। पूरी प्रक्रिया में कानूनी पहलुओं और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा गया।

निवासियों को बेहतर मेंटीनेंस की उम्मीद

सोसाइटी में इस पारदर्शी प्रक्रिया से निवासी संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं। उनका मानना है कि यदि इसी तरह जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम जारी रहा, तो आने वाले समय में सोसाइटी के मेंटीनेंस और सुविधाओं में और अधिक सुधार देखने को मिलेगा।

एनसीआर की उन सोसाइटियों के लिए, जहां हैंडओवर को लेकर अभी भी विवाद और अनिश्चितता बनी हुई है, स्कार्डी ग्रीन का यह मॉडल एक सकारात्मक और व्यावहारिक उदाहरण बनकर उभरा है।

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