गौर कैस्केड्स में नियमों पर टकराव, प्रशासन कटघरे में !
चार बोर्ड सदस्यों ने कहा, नोटिस के बावजूद कार्रवाई नहीं
विवाद के बीच 15 मार्च को बुलाई गई GBM
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित गौर कैस्केड्स सोसाइटी में चल रहे विवाद ने अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सोसाइटी के चार वर्तमान बोर्ड सदस्यों ने डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि स्पष्ट शिकायतों और साक्ष्यों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सोसाइटी के बोर्ड सदस्य संजीव मलिक, निधि शर्मा, इति सिंघल और डॉ. अनुज कुमार राठी ने डिप्टी रजिस्ट्रार को भेजे अपने ताज़ा पत्र में आरोप लगाया है कि सोसाइटी में मॉडल बायलॉज़ के विरुद्ध गतिविधियां लगातार जारी हैं। उनका कहना है कि इन अनियमितताओं की शिकायत पहले भी की गई थी, जिसमें सचिव पुनीत गोयल पर बोर्ड में मनमानी करने और नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ताओं ने अपनी शिकायत के साथ कथित तौर पर ऐसे साक्ष्य भी प्रस्तुत किए थे जिनसे यह साबित होता है कि सचिव पद पर बने रहने के लिए मॉडल बायलॉज़ का उल्लंघन किया गया।
तारीख पर तारीख, कार्रवाई शून्य

AOA के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान बोर्ड सदस्य डॉ. अनुज राठी का कहना है कि शिकायत के बाद से वे लगातार डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल “तारीख पर तारीख” ही मिल रही है। उनका आरोप है कि नोटिस जारी करने के बाद भी मामले को निर्णायक रूप से निपटाने के बजाय प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा खींचा जा रहा है।
15 मार्च की जीबीएम पर विवाद
ताज़ा विवाद सोसाइटी में 15 मार्च को प्रस्तावित आमसभा (GBM) को लेकर सामने आया है। चारों बोर्ड सदस्यों ने डिप्टी रजिस्ट्रार को ई-मेल के माध्यम से शिकायत करते हुए कहा है कि सचिव पुनीत गोयल द्वारा बुलाई गई यह GBM वैधानिक नहीं मानी जा सकती।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सोसाइटी के सचिव ने 21 नवंबर 2025 को अपना फ्लैट विक्रय कर दिया था। नियमों के अनुसार फ्लैट बिकने के साथ ही उनकी अपार्टमेंट ओनर के रूप में सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। ऐसे में उनके पद पर बने रहने और उनकी उपस्थिति में बुलाई जा रही GBM को वैध नहीं माना जा सकता।
इसी कारण चारों बोर्ड सदस्यों ने इस GBM में शामिल न होने का निर्णय लिया है।
नोटिस के बाद भी टली सुनवाई

उल्लेखनीय है कि शिकायत मिलने के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार ने अध्यक्ष और सचिव को नोटिस जारी करते हुए 12 मार्च को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने तथा साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। हालांकि 12 मार्च को डीआर को आधिकारिक कार्य से बाहर जाना पड़ गया था जिसके चलते मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। इसके लिए अगली तारीख निर्धारित की जाएगी।
इसी बीच सोसाइटी में 15 मार्च को जीबीएम बुला ली गई, जिस पर शिकायतकर्ताओं ने आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि इस आमसभा में कुछ प्रस्तावों को पारित कराकर उन्हें बाद में अपने पक्ष के साक्ष्य के रूप में पेश करने की कोशिश की जा सकती है।
कानूनी मंचों पर चुनौती की बात

दूसरी ओर, सचिव पुनीत गोयल पहले ही कह चुके हैं कि कि यदि किसी को आपत्ति है तो वे वैधानिक मंचों पर जाकर चुनौती दे सकते हैं। उनका दावा है कि सोसाइटी की कार्यवाही नियमों के अनुसार ही संचालित की जा रही है।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते स्पष्ट निर्णय ले लिया जाता तो सोसाइटी में विवाद की स्थिति पैदा ही नहीं होती।
राजनगर एक्सटेंशन की बड़ी आवासीय सोसाइटियों में से एक मानी जाने वाली गौर कैस्केड्स में चल रहा विवाद अब यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि सहकारी आवासीय संस्थाओं से जुड़े मामलों में प्रशासनिक निर्णयों में हो रही देरी कहीं विवादों को और अधिक जटिल तो नहीं बना रही।
