छह साल की जंग के बाद ‘हक़ की दस्तक’: देविका गोल्ड होम्स में रजिस्ट्री खुलते ही जश्न !
अब असली मालिक बने निवासी

NEWS1UP
संवाददाता
नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की चर्चित सोसाइटी देविका गोल्ड होम्स में आखिरकार वह दिन आ ही गया, जिसका इंतज़ार हजारों आँखें पिछले छह वर्षों से कर रही थीं। प्राधिकरण द्वारा रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी होते ही सोसाइटी में खुशी की लहर दौड़ गई, निवासियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस “हक़ की जीत” का जश्न मनाया।
लेकिन यह महज़ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि लंबी कानूनी लड़ाई, मानसिक दबाव और अनिश्चित भविष्य के खिलाफ मिली निर्णायक जीत है।
अब हम सच में अपने घर के मालिक हैं!
निवासियों के प्रतिनिधि और नेफोमा के मुख्य सलाहकार दीपक दूबे ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया।
उन्होंने कहा-
“छह साल के संघर्ष के बाद आज पहली बार महसूस हो रहा है कि हम वास्तव में अपने घर के मालिक बने हैं। अभी तक केवल कब्जा था, अधिकार नहीं।”
उन्होंने बताया कि प्राधिकरण ने रजिस्ट्री के लिए एक वर्ष की राहत अवधि दी है, जिसमें किसी प्रकार का अतिरिक्त जुर्माना नहीं लगेगा। यह निर्णय हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। हालांकि, एक वर्ष बाद देरी पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लागू होगा, जो फ्लैट के क्षेत्रफल के अनुसार तय किया जाएगा।

आज ही असली होली है
इस मौके पर निवासियों की भावनाएं खुलकर सामने आईं।
निवासी आनंद सिंह ने कहा-
“हमारे लिए असली होली आज है, क्योंकि आज हमें अपने घर का असली अधिकार मिला है।”
वहीं प्रवीन सिंह कहते हैं-
“हम लंबे समय से मानसिक दबाव में थे। असली जीत आज मिली है, जिससे हमारा भविष्य सुरक्षित हुआ है।”
पूरे नोएडा एक्सटेंशन के लिए उम्मीद की किरण
नेफोमा अध्यक्ष अन्नू खान ने इस घटनाक्रम को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा,
“ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हजारों फ्लैट खरीदार रजिस्ट्री की समस्या से जूझ रहे हैं। देविका गोल्ड में इसकी शुरुआत पूरे क्षेत्र के लिए एक उम्मीद की किरण है।”
प्राधिकरण की भूमिका पर आभार
निवासियों ने इस प्रक्रिया को गति देने के लिए एन जी रवि (सीईओ) और सौम्य श्रीवास्तव (एसीईओ) का आभार जताया। उनका मानना है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति के बिना यह संभव नहीं था।
संघर्ष से स्वामित्व तक: एक मिसाल
देविका गोल्ड होम्स की यह कहानी केवल एक सोसाइटी की जीत नहीं, बल्कि पूरे नोएडा एक्सटेंशन के फ्लैट खरीदारों के लिए एक मिसाल बनकर उभरी है। यह दिखाता है कि संगठित प्रयास, कानूनी लड़ाई और निरंतर दबाव आखिरकार व्यवस्था को झुकाने की ताकत रखते हैं।
