वैश्विक साइबर सुरक्षा का नया गढ़ बनेगा यूपी का फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट
योगी सरकार की बड़ी पहल
एआई, डीपफेक और सीमापार हैकिंग पर लगेगा शिकंजा
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
लखनऊ। डिजिटल युग में तेजी से बदलते साइबर अपराधों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने एक निर्णायक और दूरदर्शी कदम उठाया है। राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस को वैश्विक स्तर का साइबर सुरक्षा केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। यहां 500 से अधिक “साइबर फॉरेंसिक वारियर” तैयार किए जा रहे हैं, जो भविष्य में उभरते डिजिटल खतरों से मुकाबला करेंगे।
इस पहल के पीछे योगी आदित्यनाथ की स्पष्ट रणनीति है, प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाना और अपराध के बदलते तौर-तरीकों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना।
एआई, डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग से निपटने की तैयारी

संस्थान में आयोजित “मीट माई मेंटर” कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीक के विशेषज्ञों ने भविष्य के खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अजय सिंह ने कहा कि अब साइबर अपराध केवल ईमेल और एसएमएस तक सीमित नहीं रह गया है।
“वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक वीडियो और फर्जी वीडियो कॉल के जरिए बड़े पैमाने पर अपराध किए जा रहे हैं। ऐसे में यह संस्थान इन खतरों से निपटने में बेहद कारगर साबित होगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि नई पीढ़ी के मालवेयर अब खुद सीखने और विकसित होने में सक्षम हैं, जिससे साइबर सुरक्षा के पारंपरिक तरीकों को चुनौती मिल रही है।
क्वांटम तकनीक से मिलेगा सुरक्षा कवच

संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि आने वाला समय क्वांटम कंप्यूटिंग का है, जो हमारे जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करेगा। उनके अनुसार, संस्थान को एक “वन स्टॉप सेंटर” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां साइबर फॉरेंसिक, कानूनी अध्ययन और अत्याधुनिक तकनीकों का समन्वय होगा।
उन्होंने कहा-
“आज की तैयारी ही भविष्य का नेतृत्व तय करेगी। हम छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहे हैं।”
सीमापार साइबर हमलों पर लगेगा ब्रेक
यह संस्थान खास तौर पर निम्न खतरों से निपटने की क्षमता विकसित कर रहा है:
सीमापार हैकिंग
एआई-जनित फिशिंग
डीपफेक और फर्जी डिजिटल कंटेंट
क्लाउड डेटा पर हमले
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षण, अनुसंधान और फॉरेंसिक विश्लेषण की सुविधा मिलने से जांच एजेंसियों की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ेगी।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों की बढ़ेगी भूमिका
साइबर हमलों के जटिल होते स्वरूप के बीच फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका अब बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। डेटा चोरी, डिजिटल धोखाधड़ी और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों की जांच में प्रशिक्षित मानव संसाधन ही सबसे बड़ा हथियार बनेंगे।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो रहा यूपी
संस्थान का लक्ष्य केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना भी है। आधुनिक तकनीकों को सरल तरीके से समझाने और व्यवहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस अवसर पर उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव, चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, पीआरओ संतोष तिवारी, फेकल्टी डॉ. सपना शर्मा, डॉ. श्रुतिदास गुप्ता, डॉ. प्रीती, डॉ. कमलेश दुबे, डॉ. नेहा, डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. स्नेहा, डॉ. स्नेहिल सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
