नवरात्र में ‘नन्ही कली’ का उत्सव: बागपत में मैरी कॉम करेंगी बेटियों का सम्मान !
महिला कारीगरों की गुड़िया से लड़कियों को सशक्तीकरण व प्रेरणा देना पहल का उद्देश्य
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही बागपत एक ऐसी मिसाल पेश करने जा रहा है, जो नारी सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता, तीनों को एक साथ मजबूत करती है। योगी आदित्यनाथ के विजन को साकार करती यह पहल ‘नन्ही कली’ कार्यक्रम के रूप में सामने आ रही है, जिसमें छह बार की विश्व चैंपियन मैरी कॉम बेटियों का सम्मान करेंगी।

नवरात्र में नारी शक्ति का संदेश, सरकार के विजन को धार
नवरात्र, जो स्वयं नारी शक्ति का प्रतीक है, उसी पावन अवसर पर ‘नन्ही कली’ कार्यक्रम का आयोजन इसे और अधिक सार्थक बना देता है। यह पहल सीधे तौर पर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘मिशन शक्ति’ जैसे अभियानों को जमीनी स्तर पर नई ऊर्जा देने का काम कर रही है।
कचरे से कंचन: प्लास्टिक से बनी ‘नन्ही कली’

इस पहल की सबसे खास बात है इसकी पर्यावरणीय सोच। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के अनुसार, ‘नन्ही कली’ गुड़िया में पारंपरिक रुई या स्पंज की जगह बेकार प्लास्टिक बोतलों से बने फाइबर का उपयोग किया गया है।
यह प्रयोग न केवल प्लास्टिक कचरे की समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि ‘कचरे से कंचन’ की अवधारणा को भी जीवंत करता है।
गांव की महिलाओं की बदली तस्वीर

‘नन्ही कली’ सिर्फ एक गुड़िया नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की नई कहानी है। कपड़ों के टुकड़ों और रिसाइकिल सामग्री से तैयार की जा रही ये गुड़िया महिलाओं को रोजगार दे रही है और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है।
यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी मजबूती दे रही है, जहां स्थानीय हुनर को पहचान और बाजार मिल रहा है।
मैरी कॉम की मौजूदगी से बढ़ेगा आत्मविश्वास
कार्यक्रम में मैरी कॉम की उपस्थिति इसे और खास बना रही है। उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। वे बेटियों को यह संदेश देंगी कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकते।
‘जीरो वेस्ट’ से नई पहचान की ओर बागपत
जिलाधिकारी के ‘जीरो वेस्ट’ विजन के तहत शुरू हुई यह पहल अब बागपत को एक नई पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ‘नन्ही कली’ अब एक प्रतीक बन चुकी है, जहां पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और महिला सशक्तीकरण एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।
