अंतरराष्ट्रीय सामाजिक कार्य दिवस: दीपांशु मित्तल का सोशल मॉडल बना मिसाल !
जब दुनिया महामारी के अंधेरे दौर से गुजर रही थी और शहरों की रफ्तार थम चुकी थी, उसी वक्त कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने हालात के आगे घुटने टेकने के बजाय समाज को जोड़ने का बीड़ा उठाया। गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले दीपांशु मित्तल उन्हीं चुनिंदा लोगों में से एक हैं, जिन्होंने संकट को अवसर में बदलते हुए मदद की एक ऐसी श्रृंखला शुरू की, जो आज हजारों लोगों के जीवन को छू रही है। एक साधारण निवासी से लेकर 10,000 से अधिक लोगों को जोड़ने वाले सामाजिक नेटवर्क के निर्माता बनने तक का उनका सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो एक व्यक्ति भी पूरे समाज में बदलाव की लहर ला सकता है।
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भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन, जो कभी केवल एक रिहायशी इलाका माना जाता था, आज सामाजिक सहभागिता के एक नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। इस बदलाव के केंद्र में हैं दीपांशु मित्तल, जिन्होंने व्यक्तिगत पहल को सामूहिक आंदोलन में बदल दिया।
मई 2019 में दिल्ली से यहां शिफ्ट हुए मित्तल ने शायद ही सोचा होगा कि उनका नाम एक दिन हजारों लोगों की मदद से जुड़ जाएगा। लेकिन 2020 में आई कोरोना महामारी ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
कोरोना संकट में शुरू हुआ ‘मिशन मदद’
जब देश लॉकडाउन में था और माइग्रेंट मजदूर भूख से जूझ रहे थे, तब दीपांशु मित्तल ने आगे बढ़कर भोजन की व्यवस्था शुरू की। यहीं से एक ऐसी सोच ने जन्म लिया, जिसने पूरे क्षेत्र को जोड़ने का काम किया।
दीपांशु मित्तल कहते हैं-
“उस समय समझ आया कि अगर लोग साथ आ जाएं, तो कोई भी संकट बड़ा नहीं होता।”
व्हाट्सएप से बना ‘सामाजिक नेटवर्क’
कोरोना काल में ही एक साधारण व्हाट्सएप ग्रुप से शुरुआत हुई, उद्देश्य था रक्तदान और इमरजेंसी मदद। आज यही पहल 100 से अधिक सक्रिय ग्रुप और 10,000 से अधिक सदस्यों को जोड़ने का माध्यम बन चुकी है। इन समूहों में रक्तदान, हेल्थ इमरजेंसी, बुक डोनेशन, कारपूल, जॉब सर्च, बिजनेस प्रमोशन, मीडिया सपोर्ट, प्रॉपर्टी तथा धार्मिक यात्रा जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जुडी सहायता मुहैय्या करायी जाती है।

नेतृत्व की भूमिका: सोसायटी से फेडरेशन तक
अप्रैल 2021 में मित्तल को ब्रेव हार्ट्स सोसायटी की AOA में महासचिव बनाया गया। इसके बाद 2022 से वे फेडरेशन ऑफ राजनगर एक्सटेंशन सोसाइटीज की कार्यकारिणी का हिस्सा बने और मीडिया प्रभारी जैसे अहम पद संभाले। उनकी भूमिका केवल पद तक सीमित नहीं रही, उन्होंने अलग-अलग सोसायटीज को जोड़ने का काम किया।
2 लाख लोगों के लिए एक साझा मंच का सपना
राजनगर एक्सटेंशन की लगभग 2 लाख आबादी के लिए दीपांशु मित्तल एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं, जहां लोग अपनी समस्याएं खुलकर रख सकें, जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके, विचारों का आदान-प्रदान हो और सामूहिक विकास को बढ़ावा मिले।
दीपांशु का कहना है कि-
“समाज तब बदलता है, जब लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं।”
युवाओं के लिए संदेश
मित्तल का मानना है कि समाज सेवा के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि छोटी शुरुआत और सच्ची नीयत की जरूरत होती है।
दीपांशु का मानना है कि-
“अगर हर व्यक्ति 10 लोगों की मदद करने का संकल्प ले ले, तो पूरा समाज बदल सकता है।”
डिजिटल से मजबूत होगा नेटवर्क
दीपांशु का अब लक्ष्य है इस नेटवर्क को और संगठित करना, एक ऐसा स्थायी डिजिटल सपोर्ट सिस्टम, जहां हर जरूरतमंद तक समय पर सहायता पहुंच सके। दीपांशु मित्तल की पहल यह साबित करती है कि असली बदलाव सरकारों या योजनाओं से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों से आता है।
