गाजियाबाद में ‘पालतू’ बना खतरा: कुत्ते ने 7 महीने के मासूम को नोचा !
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बिना पट्टा-मज़ल खुले में घूम रहा था कुत्ता
आधी रात की घटना से दहली सोसायटी
CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर, मालकिन पर केस दर्ज

NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक स्थित सुपरटेक लिविंग्सटन सोसाइटी से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने “पालतू जानवर” और “सुरक्षित आवास” की पूरी अवधारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार रात करीब 12:15 बजे, फ्लैट C-2/402 निवासी सौरभ त्रिपाठी अपने 7 महीने के बच्चे और पत्नी के साथ सोसायटी परिसर में टहल रहे थे। सब कुछ सामान्य था, तभी अचानक एक पालतू कुत्ता, जो बिना पट्टा और मज़ल के खुला घूम रहा था, बिजली की तरह बच्चे पर झपटा।
हमला इतना अचानक और तेज था कि बच्चा स्टॉलर समेत पलटकर जमीन पर गिर पड़ा। उसके सिर के पिछले हिस्से में गंभीर चोट आई। CCTV फुटेज में यह पूरा मंजर कैद है, एक ऐसा दृश्य, जिसे देखकर किसी भी अभिभावक की रूह कांप जाए।
बचाने दौड़े, खुद शिकार बन गए
माता-पिता जब बच्चे को बचाने दौड़े, तो कुत्ते ने उन पर भी हमला कर दिया। कुछ सेकंड की इस घटना ने पूरे परिवार को लहूलुहान कर दिया, और पीछे छोड़ गया एक बड़ा सवाल, आखिर इस लापरवाही की कीमत कौन चुकाएगा ?
‘पालतू’ के नाम पर खुली छूट ?
जांच में सामने आया कि कुत्ता बिना किसी नियंत्रण के परिसर में घूम रहा था, न पट्टा, न मज़ल यानी नियमों की खुलेआम धज्जियां। पुलिस ने कुत्ते की मालकिन शालिनी मिश्रा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
एसीपी वेव सिटी प्रियश्री पाल के अनुसार-
लापरवाही से जान जोखिम में डालने और खतरनाक तरीके से चोट पहुंचाने जैसी धाराओं में केस दर्ज हुआ है। CCTV खंगाले जा रहे हैं।
लेकिन हर बार की तरह, सवाल वही, क्या एफआईआर से ज्यादा कुछ होगा ?
सोसायटी की चुप्पी, सिस्टम की नाकामी
यह पहली घटना नहीं है। NCR की कई सोसायटियों में पालतू कुत्तों के हमले लगातार सामने आ रहे हैं, और हर बार एक ही पैटर्न:
नियम मौजूद, पालन गायब
शिकायतें दर्ज, कार्रवाई शून्य
हादसा हुआ, फिर थोड़ी हलचल… और फिर सन्नाटा
क्या सोसायटी प्रबंधन सिर्फ मेंटेनेंस चार्ज लेने तक सीमित है ?
बच्चे: सबसे आसान शिकार
विशेषज्ञों की मानें तो कुत्तों के हमलों के छोटे बच्चे लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं, कम कद, अनियंत्रित हरकतें और खुद की रक्षा करने में असमर्थता उन्हें “सॉफ्ट टारगेट” बना देती है। इस घटना में भी वही हुआ, एक 7 महीने का बच्चा, जो चल भी नहीं सकता, ‘जिम्मेदारियों’ की कमी का शिकार बन गया।
कानून किताबों में, खतरा ज़मीन पर
नगर निकायों के स्पष्ट नियम हैं-
सार्वजनिक स्थानों पर कुत्ते को पट्टा और मज़ल जरूरी
ट्रेनिंग और वैक्सीनेशन अनिवार्य
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये नियम सिर्फ कागजों में जिंदा हैं।
सवाल उठना लाजमी है कि क्या “पेट लव” अब “पब्लिक रिस्क” बनता जा रहा है ? क्या एक वर्ग की सुविधा के लिए बाकी लोगों की सुरक्षा दांव पर लगाई जा रही है ?

Bahut hi hirdaya vidyavidarak ghatna hai . Ye resident / dog owner ki laparvahi ka natija hai .
Isme dog ke malik per FIR ke saath saath turant karyavahi honi chahiye . Saath hi padadhiksryo per bhi action hona chahiye .Anya sabhi residents ko turant baithak bulani chahiye ,aur thos nirya par aana chahiye . Aaj ki chuppi aney vale samay me vikraal rup dharan kar legi . Dhanyavad .