राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में की ‘श्रीराम यंत्र’ की प्रतिष्ठापना

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चैत्र नवरात्रि के पहले दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंजा अयोध्या धाम

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भूमेश शर्मा

अयोध्या। देश की आस्था के सबसे बड़े केंद्र अयोध्या में आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण दर्ज हुआ, जब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ‘श्रीराम यंत्र’ की विधिवत प्रतिष्ठापना की। वैदिक मंत्रोच्चार, संतों की उपस्थिति और भव्य अनुष्ठान के बीच यह आयोजन श्रद्धा, परंपरा और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम बन गया।

रामलला के चरणों में राष्ट्रपति का नमन

राष्ट्रपति ने नव संवत्सर के शुभ अवसर पर रामलला के दरबार में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने आरती उतारी और प्रभु के चरणों में शीश झुकाकर देशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान आनंदीबेन पटेल और योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे और सभी ने सामूहिक रूप से दर्शन-पूजन किया।

द्वितीय तल पर ‘श्रीराम यंत्र’ की प्राण प्रतिष्ठा

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ मुहूर्त में मंदिर के द्वितीय तल पर ‘श्रीराम यंत्र’ की प्रतिष्ठापना वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई। यह यंत्र वैदिक गणित और जटिल ज्यामितीय संरचनाओं पर आधारित है, जिसे देवताओं का निवास और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।

विशेष बात यह है कि यह यंत्र करीब दो वर्ष पूर्व विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा भव्य शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या लाया गया था। इसके लिए दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के विद्वान आचार्यों द्वारा नौ दिवसीय विशेष वैदिक अनुष्ठान पहले से चल रहा था।

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संतों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

इस ऐतिहासिक अवसर पर आध्यात्मिक जगत की प्रमुख हस्तियां भी उपस्थित रहीं, जिनमें मां अमृतानंदमयी प्रमुख थीं। साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और सदस्य गोपाल जी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मंदिर परिसर का अवलोकन

राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर का विस्तृत भ्रमण भी किया और यहां की भव्य दीवारों पर उकेरी गईं पौराणिक आकृतियों व शिल्पकला की सराहना की। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे अयोध्या शहर को विशेष रूप से सजाया गया।

आध्यात्मिक और राष्ट्रीय महत्व

यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक विरासत का भी प्रतीक बनकर उभरा। चैत्र नवरात्रि और नव संवत्सर के शुभ संगम पर ‘श्रीराम यंत्र’ की प्रतिष्ठापना को देशभर के श्रद्धालु एक विशेष ऊर्जा और सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं।

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