हाउस टैक्स पर राहत की जगह मिला आश्वासन, दूसरे ही दिन खत्म हुआ अनिश्चितकालीन धरना!
शहीद चौक पर शुरू हुआ संघर्ष, भरोसे पर खत्म
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। दुनिया के इतिहास में भगत सिंह का नाम साहस, जुनून और अन्याय के खिलाफ अडिग संघर्ष के प्रतीक के रूप में दर्ज है। 23 मार्च को उनका बलिदान दिवस बीते अभी कुछ ही दिन हुए हैं, और शायद इसी प्रेरणा से महानगर उद्योग व्यापार मंडल ने हाउस टैक्स की बढ़ी दरों के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन का बिगुल फूंका था। आंदोलन स्थल भी प्रतीकात्मक रूप से शहीद भगत सिंह चौक चुना गया, लेकिन यह आंदोलन अपने नाम और भावनाओं के विपरीत महज एक दिन में आश्वासन के साथ समाप्त हो गया।
अधिकारियों का आश्वासन, धरना समाप्त
शनिवार को शुरू हुआ यह धरना रविवार को उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जब अपर नगरायुक्त अविंद्र कुमार, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एस.के. राय और जोनल प्रभारी सिटी आर.पी. सिंह धरना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने मंच से आश्वासन दिया कि फिलहाल नगर निगम की ओर से हाउस टैक्स से संबंधित कोई एसएमएस या संदेश नहीं भेजा जाएगा, न ही प्रचार-प्रसार के लिए एनाउंसमेंट कराई जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया कि हाउस टैक्स वृद्धि का मामला शासन स्तर पर विचाराधीन है और संशोधित दरों के प्रस्ताव शीघ्र भेजे जाएंगे, जिनमें वर्तमान बढ़ी दरों को कम किया जाएगा। इसके लिए तीन माह का समय मांगा गया।
इन्हीं आश्वासनों के आधार पर अनिश्चितकालीन घोषित धरना दूसरे ही दिन समाप्त कर दिया गया।
‘फूट डालो’ की नीति पर उठे सवाल
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकार इसे ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि हाउस टैक्स के मुद्दे पर प्रशासनिक रणनीति आंदोलन को लंबा खिंचने से पहले ही ठंडा करने की रही है।

पहले भी कई आंदोलन, नतीजा शून्य
गौरतलब है कि इसी महीने यह दूसरा बड़ा आंदोलन है, जो निवासियों को बिना किसी ठोस और स्थायी राहत दिए बिना ही खत्म हो गया। इससे पहले भी सदन से लेकर सड़क तक कई विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। इस बीच महापौर सुनीता दयाल कई बार सार्वजनिक रूप से यह कह चुकी हैं कि हाउस टैक्स की दरें नहीं बढ़ेंगी और पुरानी दरों पर ही वसूली होगी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है, शहरवासियों को लगातार बढ़ी हुई दरों के नोटिस और संदेश मिल रहे हैं।
जनता असमंजस में, निर्णय किसके हाथ ?
ऐसे में आम नागरिकों के बीच असमंजस की स्थिति गहराती जा रही है। अब यह सवाल भी मुखर हो रहा है कि जब शहर की प्रथम नागरिक की घोषणाएं ही लागू नहीं हो पा रहीं, तो निगम के भीतर निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति किसके हाथ में है। प्रश्न यह उठता है कि अब क्या आम करदाता यह मानकर चले कि जन प्रतिनिधि तो जनता के लिए संवेदनशील हैं परन्तु प्रशासनिक अमला उनकी भावनाओं के आड़े आ रहा है ?

धरने को मिला विशाल जन समर्थन
महानगर उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में व्यापारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। प्रमुख रूप से जिला अध्यक्ष रामकिशोर अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष गोपीचंद, महानगर महामंत्री अशोक चावला, महानगर चेयरमैन बृजमोहन सिंघल, वाइस चेयरमैन के.पी. गुप्ता, गाजियाबाद विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष सुनील गोयल, जिला महामंत्री राजदेव त्यागी, पवन शर्मा, विकास अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, अनुराग गर्ग, राकेश स्वामी, संजीव मित्तल, अजय बंसल, प्रदीप गर्ग, युवा महानगर चेयरमैन मनोज गर्ग, युवा अध्यक्ष विपिन गोयल, युवा वरिष्ठ महामंत्री पंकज गुप्ता, युवा महामंत्री वसीम अली, डॉ. हरीश शर्मा, हितेंद्र शर्मा, संजीव गुप्ता, कोषाध्यक्ष अनित मदान, पवन शर्मा (लाइन पार), नितिन वर्मा, घंटाघर गोले मार्केट अध्यक्ष राकेश बबेजा, जुगल किशोर (नीटा), विजय ढिंगरा, रजेश लोहिया, पूरन शर्मा, राकेश पचौरी, अमित बंसल, जसवीर त्यागी, स्वतंत्र यादव, वी.के. अग्रवाल, पार्षद नीरज गोयल, नगर निगम से इस्तीफा देने वाले धीरेंद्र यादव, पूर्व पार्षद जाकिर अली सैफी, प्रदीप बंसल, मुखविंदर सिंह, सुखविंदर सिंह, अनिल मित्तल, मनोज वोहरा, जयवीर सिंह, नितिन गोयल, प्रिंस गोयल, अनिल यादव, सुरेंद्र चानना, सुनील गुप्ता, महेश गर्ग, जयवीर सिंह (पेट्रोल पंप) सहित बड़ी संख्या में व्यापारीगण, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
