पीसीएस-2024 में दादरी की दो बेटियों का परचम: डेरी मच्छा गांव से उठी सफलता की नई मिसाल

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92.7% स्थानीय, 7.3% बाहरी अभ्यर्थियों की सफलता

यूपी पीसीएस बना राष्ट्रीय भरोसे की मजबूत पहचान

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ/दादरी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा घोषित पीसीएस-2024 परिणाम ने जहां पूरे देश में यूपी की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को और मजबूत किया है, वहीं गौतमबुद्ध नगर के दादरी क्षेत्र के एक छोटे से गांव डेरी मच्छा ने इस सफलता को एक भावनात्मक और प्रेरणादायक कहानी में बदल दिया है। यहां के निवासी मनवीर नागर की दो बेटियों, नेहा नागर (रैंक 156) और निधि नागर (रैंक 161) ने एक साथ सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है। दोनों बेटियों का चयन असिस्टेंट कमिश्नर (कॉमर्शियल टैक्स) के पद पर हुआ है।

गांव से उठी दोहरी कामयाबी

दादरी के डेरी मच्छा गांव की यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि दोनों सफल अभ्यर्थी सगी बहनें हैं। गॉंव में पली-बढ़ीं नेहा और निधि ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची, तो किसी भी पृष्ठभूमि से निकलकर बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।

उनके पिता मनवीर नागर, जो क्षेत्र में अपने सरल और सामाजिक स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, आज पूरे गांव के गर्व का कारण बन गए हैं। गांव में जश्न का माहौल है और हर कोई इन बेटियों की सफलता को अपनी उपलब्धि मान रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर यूपी मॉडल की गूंज

पीसीएस-2024 का यह परिणाम केवल व्यक्तिगत सफलताओं तक सीमित नहीं है। इस बार 10 अन्य राज्यों, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की परीक्षा प्रणाली अब राष्ट्रीय स्तर पर भरोसे का प्रतीक बन चुकी है।

कुल 932 चयनित अभ्यर्थियों में से 68 अन्य राज्यों के हैं, जो यह दर्शाता है कि पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन की वजह से यूपी अब देशभर के युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

हर जिले से उभर रही प्रतिभा

इस बार के परिणामों में उत्तर प्रदेश के 75 में से 74 जिलों के अभ्यर्थियों का चयन होना यह साबित करता है कि अब अवसर केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं। लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर और आगरा जैसे प्रमुख शहरों के साथ-साथ छोटे जिलों और गांवों से भी प्रतिभाएं सामने आ रही हैं, जैसा कि डेरी मच्छा गांव की इस सफलता से स्पष्ट है।

बेटियों की बढ़ती भागीदारी

पीसीएस-2024 में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। टॉप 5 में 80% महिला अभ्यर्थियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि अब बेटियां केवल भागीदारी नहीं, बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। नेहा और निधि नागर की सफलता इसी बदलते सामाजिक परिदृश्य की मजबूत तस्वीर पेश करती है।

समान अवसर, संतुलित चयन

वर्गवार चयन आंकड़े भी इस परीक्षा की निष्पक्षता को रेखांकित करते हैं, सामान्य, ओबीसी, एससी, ईडब्ल्यूएस और एसटी सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को समान अवसर मिला है। टॉप 20 में ओबीसी वर्ग की मजबूत भागीदारी यह संकेत देती है कि अब प्रतिस्पर्धा का मैदान वास्तव में संतुलित और समावेशी हो चुका है।

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