तिलपता चौक पर ‘डेथ ट्रैप’ बना 130 मीटर रोड ! हर दिन हादसे… कब जागेगा प्राधिकरण ?
कई जानें गईं… दशकों से अधूरा पड़ा 100 मीटर हिस्सा बना ‘डेथ जोन’, फिर भी नहीं जागा प्राधिकरण
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गौतमबुद्ध नगर। ग्रेटर नोएडा की चमकती सड़कों और विकसित होते इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच एक ऐसा काला सच छिपा है, जो हर दिन लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। 130 मीटर नोएडा–ग्रेटर नोएडा रोड पर तिलपता चौक के पास का वह हिस्सा आज भी जर्जर, अधूरा और खतरनाक बना हुआ है, जहां सैकड़ों सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और कई लोगों की जान जा चुकी है। सवाल यह है कि आखिर कब तक प्रशासन की यह उदासीनता लोगों की जिंदगी से खेलती रहेगी ?

इसी गंभीर मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन मंच ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के नाम एक ज्ञापन एसडीएम ग्रेटर नोएडा विजय कुमार शर्मा को सौंपा। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव मास्टर मनमिंदर भाटी ने बताया कि अधिसूचित ग्राम चौगानपुर की गोचर भूमि (खाता संख्या 140) और 130 मीटर रोड पर स्थित दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट को लेकर वर्षों से लंबित समस्याएं अब जनहित के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
मास्टर मनमिंदर भाटी कहते हैं कि- 
“यह सिर्फ सड़क नहीं, जनजीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
गोचर भूमि पर भी संकट
ज्ञापन में बताया गया कि चौगानपुर की लगभग 30 बीघा गोचर भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। यह भूमि न सिर्फ पशुओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे मुक्त कराकर आवारा व बेसहारा गौवंश के लिए आश्रय स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
जिला अध्यक्ष अक्षय मुखिया ने सुझाव दिया कि- 
आसपास के तुस्याना, सुत्याना, भूड़ा और ककरेट गांवों की गोचर भूमि को मिलाकर उत्तर प्रदेश का पहला ‘गौ अभ्यारण’ भी स्थापित किया जा सकता है।
वहीं, संगठन मंत्री डॉ. यामीन ने 130 मीटर रोड को ग्रेटर नोएडा की “लाइफ लाइन” बताते हुए कहा कि दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा वेस्ट को जोड़ने वाली इस अहम सड़क की बदहाली प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है।
युवा प्रदेश अध्यक्ष सागर यादव के अनुसार, तिलपता चौक से नोएडा की ओर करीब 500 मीटर का हिस्सा दशकों से मरम्मत के अभाव में पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिससे यह क्षेत्र दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बन गया है।
क्यों बना ‘डेथ जोन’ ?

इस समस्या की जड़ में एक पुराना कानूनी विवाद भी है। प. उत्तर प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण भड़ाना ने बताया कि संबंधित भूमि पर तोशा इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड का स्वामित्व विवाद और स्थगन आदेश होने के कारण सड़क का एक हिस्सा आज तक अधूरा पड़ा है। नतीजतन, करीब 100 मीटर का हिस्सा कच्चा है, जहां धूल, गड्ढे और जोखिम हर पल लोगों को घेरते हैं।
जिलाध्यक्ष (बुलंदशहर) अन्नू सरपंच ने कहा कि इस विवाद का समाधान बातचीत और सकारात्मक पहल से संभव है। लेकिन वर्षों से चली आ रही लापरवाही के कारण न सिर्फ जान-माल का नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण और शहर की छवि भी प्रभावित हो रही है।
भाकियू मंच ने ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि प्राधिकरण ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो किसान संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा। संगठनों ने “आउट ऑफ कोर्ट” समाधान के जरिए सड़क निर्माण और गोचर भूमि के संरक्षण की मांग की है।
