गुलमोहर गार्डन में “टीम संकल्प” का जलवा ! जश्न में डूबी सोसाइटी !!

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AOA चुनाव में 10/10 सीटों पर शानदार जीत

खूब बाजे ढोल-ताशे !

NEWS1UP

एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क

गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित गुलमोहर गार्डन सोसाइटी में AOA चुनाव  के परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित कर दिए गए हैं। लंबे समय से चुनाव कराए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बाद जैसे ही मतदान प्रक्रिया पूरी हुई, परिणामों ने एकतरफा जनसमर्थन की तस्वीर साफ कर दी।

घोषित नतीजों के अनुसार, ‘टीम संकल्प ने सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया है, जिससे सोसाइटी की नई प्रबंधन टीम अब पूरी तरह एक पैनल के हाथों में आ गई है।

विजेता उम्मीदवारों की सूची 

मुकेश भटनागर – 472.51

प्रमोद कुमार – 466.46

आकांक्षा गुप्ता – 462.92

चमन लाल – 449.48

राजेश शर्मा – 445.21

रचना शर्मा – 444.77

संचित जैन – 411.60

रवि अग्रहरी – 403.61

वरुण गोयल – 397.76

समीर के. ठक्कर – 397.48

एकजुट रणनीति की बड़ी जीत

“टीम संकल्प” की इस जीत को सोसाइटी के भीतर मजबूत संगठन, स्पष्ट एजेंडा और सामूहिक रणनीति का परिणाम माना जा रहा है। विशेष रूप से शीर्ष तीन उम्मीदवारों मुकेश भटनागर, प्रमोद कुमार और आकांक्षा गुप्ता के बीच प्राप्त मत प्रतिशत यह दर्शाता है कि पैनल को व्यापक और संतुलित समर्थन मिला।

जीत के साथ उत्सव का माहौल

जैसे ही “टीम संकल्प” की जीत की घोषणा हुई, गुलमोहर गार्डन में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। फूल-मालाओं के साथ सभी विजयी प्रत्याशियों का जोरदार स्वागत किया गया। परिसर में ढोल-ताशों की गूंज सुनाई दी, वहीं समर्थकों और विजेता उम्मीदवारों ने जमकर भांगड़ा और डांस कर अपनी खुशी का इजहार किया। पूरे वातावरण में उत्साह और उल्लास साफ झलक रहा था। जीत की खुशी में सोसाइटी में जमकर आतिशबाजी भी हुई। 

नई टीम के सामने बड़ी जिम्मेदारी

अब जब AOA की कमान पूरी तरह “टीम संकल्प” के हाथों में आ गई है, तो सोसाइटी के निवासियों की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। निवासियों को उम्मीद है कि नई टीम मेंटेनेंस और सुविधाओं में सुधार करेगी, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था लागू करेगी और सोसाइटी के समग्र विकास को नई दिशा देगी।

चुनाव से प्रशासनिक स्थिरता की ओर

काफी समय से चुनाव कराए जाने को लेकर बनी स्थिति के बाद, अब परिणाम घोषित होने से प्रशासनिक स्पष्टता और स्थिरता का रास्ता खुल गया है। निवासियों का मानना है कि एक ही पैनल के हाथों में पूरी जिम्मेदारी आने से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो सकती है।

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