गौर कैस्केड्स: नवोदय टीम के 11 प्रत्याशी मैदान में, चुनावी जंग तेज
डिप्टी रजिस्ट्रार के सख्त निर्देश के बाद बदला नियम
जॉइंट ओनर को वोटिंग से किया गया बाहर
NEWS1UP
एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की गौर कैस्केड्स सोसाइटी में एओए चुनाव ने इस बार महज़ एक प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक चेतना के एक सशक्त उत्सव का रूप ले लिया है। रविवार को नामांकन के अंतिम दिन नवोदय टीम के 11 प्रत्याशियों ने जबरदस्त जनसमर्थन के बीच अपने पर्चे दाखिल किए। नामांकन स्थल पर उमड़ी भीड़ ने साफ संकेत दे दिया कि इस बार मुकाबला केवल पदों का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, अधिकार और व्यवस्था के भविष्य का है।

नामांकन से पहले सभी प्रत्याशी और उनके समर्थक श्री राधा कृष्ण मंदिर पहुंचे। पूजा-अर्चना और आशीर्वाद के साथ चुनावी शंखनाद हुआ, जहां “सकारात्मक नेतृत्व” और “साझा विकास” के संकल्प दोहराए गए।
11 चेहरे, एक रणनीति: सत्ता की निरंतरता या नई चुनौती ?

नवोदय टीम, जो पहले से ही प्रबंधन की कमान संभाले हुए है, ने एक बार फिर अपने 11 प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपने विकास मॉडल और कार्यशैली पर जनता का दोबारा विश्वास चाहती है।
मैदान में उतरे प्रत्याशी:
दीपक शर्मा, अखिल अग्रवाल, पुनीत गोयल, मंजूषा गोयल, देवेंद्र जैन, राघव रस्तोगी, नितिन गुप्ता, श्रीमती नीरज राठी, गौरव भाटिया, सचिन तेवतिया और अंकित तायल।
फिलहाल सभी नामांकन पत्र स्क्रूटनी के अधीन हैं, जिसके बाद अंतिम उम्मीदवारों की तस्वीर साफ होगी।
‘जॉइंट ओनर’ पर रोक, केवल फर्स्ट ओनर ही वोटर
इस चुनाव का सबसे बड़ा और निर्णायक पहलू रहा, मताधिकार को लेकर उठा विवाद। शुरुआत में निर्वाचन समिति ने जॉइंट ओनर्स को भी मतदान और नामांकन की अनुमति दे दी थी, जिससे चुनावी गणित अचानक बदलता नजर आया। लेकिन मामला प्रशासन तक पहुंचा और डिप्टी रजिस्ट्रार के सख्त हस्तक्षेप के बाद समिति को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा।
अब चुनाव पूरी तरह मॉडल बायलॉज के अनुरूप होगा, जिसमें केवल फर्स्ट ओनर (प्रथम स्वामी) को ही मतदान का अधिकार प्राप्त होगा। यह फैसला न केवल नियमों की पुनर्स्थापना का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक सख्ती के आगे किसी भी प्रकार की मनमानी टिक नहीं सकती।
निगरानी में चुनाव, पारदर्शिता पर फोकस
पूरी चुनावी प्रक्रिया एक स्वतंत्र निर्वाचन समिति की निगरानी में संचालित हो रही है। मुख्य चुनाव अधिकारी देवेंद्र नारंग के साथ सदस्य संजीव कुमार और श्याम बाबू कुलश्रेष्ठ निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में जुटे हैं।
जागरूकता बनाम ‘कब्जे की संस्कृति’

गौर कैस्केड्स में जिस तरह से निवासी खुलकर चुनाव प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं, वह एक मजबूत लोकतांत्रिक सोच का परिचायक है। इसके उलट, कई सोसाइटीज़ में आज भी “यहां चुनाव की जरूरत नहीं” जैसे तर्क देकर वर्षों तक एक ही समूह प्रबंधन पर काबिज रहता है। सवाल उठता है, क्या यह सुविधा है या सुनियोजित नियंत्रण ?
जानकारों का मानना है कि जहां चुनाव नहीं होते, वहां पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। नियमों की अनदेखी, वित्तीय अनियमितताएं और बिल्डर से कथित सांठ-गांठ जैसे मामले आम हो जाते हैं। कई जगहों पर हैंडओवर के दौरान सीसी, ओसी जैसे अनिवार्य दस्तावेज तक नहीं लिए जाते, और आईएफएमएस जैसी बड़ी राशि भी निवासियों के हित में सुरक्षित नहीं हो पाती।
गौर कैस्केड्स बना ‘मॉडल’, अब सबकी नजरें वोटिंग पर
गौर कैस्केड्स में उभरती यह चुनावी तस्वीर अन्य सोसाइटीज़ के लिए एक स्पष्ट संदेश है, जागरूक निवासी ही मजबूत प्रबंधन की नींव होते हैं। अब निगाहें स्क्रूटनी के बाद होने वाली मतदान प्रक्रिया पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि क्या नवोदय टीम अपनी पकड़ बरकरार रखेगी या कोई नया समीकरण उभरेगा।
