15-15 घंटे काम, 7 हजार वेतन! सिकंदराबाद इंडस्ट्रियल एरिया में मजदूरों के शोषण का बड़ा खुलासा

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भारतीय किसान यूनियन मंच का डीएम को ज्ञापन

नई श्रम संहिता लागू कराने की मांग

NEWS1UP

संवाददाता

बुलंदशहर। भारतीय किसान यूनियन (मंच) ने बुधवार को जिलाधिकारी व उप श्रम आयुक्त बुलंदशहर को ज्ञापन सौंपकर सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र में संचालित कारखानों में मजदूरों के कथित शोषण पर कड़ी आपत्ति जताई। संगठन ने केंद्र सरकार द्वारा लागू नई श्रम संहिता के प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से लागू कराने की मांग की है।

यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव मास्टर मनमिंदर भाटी ने बताया कि करीब 1400 एकड़ में फैले सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल, पेंट, पाउडर और रबर जैसे रेड व ऑरेंज श्रेणी के उद्योग बड़ी संख्या में संचालित हैं। इन उद्योगों में काम करना स्वास्थ्य की दृष्टि से जोखिमपूर्ण है, जहां लाखों पुरुष व महिला मजदूर कार्यरत हैं।

युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चिंकू यादव ने आरोप लगाया कि मजदूरों को न्यूनतम वेतन और कार्य के घंटों के मामले में भारी असमानता का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई मजदूरों से 15-15 घंटे तक काम लिया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता।

प्रदेश प्रभारी विक्रांत भाटी ने बताया कि मजदूरों को साप्ताहिक अवकाश तक नहीं दिया जा रहा है। वहीं, महिला मजदूरों को मात्र 6 से 7 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाना लैंगिक भेदभाव का गंभीर उदाहरण है।

मेरठ मंडल अध्यक्ष अमित प्रधान ने कहा कि अधिकांश कारखानों में मजदूरों के लिए सुरक्षा उपाय, विश्राम स्थल, स्वच्छ पेयजल और कैंटीन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जबकि ये नियमों के तहत अनिवार्य हैं।

जिलाध्यक्ष बुलंदशहर अन्नू सरपंच ने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से लागू नई श्रम संहिता के तहत मजदूरों के शारीरिक और आर्थिक शोषण पर रोक है। उन्होंने बताया कि संहिता के अनुसार न्यूनतम वेतन, 8 घंटे से अधिक कार्य पर दोगुना भुगतान, नियुक्ति पत्र की अनिवार्यता और साप्ताहिक अवकाश जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

कृष्ण भड़ाना ने कहा कि नई संहिता में सप्ताह में तीन अवकाश का भी प्रावधान है, जबकि अक्षय मुखिया ने आरोप लगाया कि कई मामलों में घायल मजदूरों के उपचार तक की समुचित व्यवस्था नहीं की जाती।

यूनियन ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि औद्योगिक क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन हो रहा है, जिससे मजदूरों और आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि नई श्रम संहिता के प्रावधानों को तत्काल लागू कराया जाए और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो भारतीय किसान यूनियन (मंच) धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होगी।

इस दौरान अजब सिंह भाटी, अरव यादव, सचिन भाटी, पुष्पेंद्र यादव, शैफ प्रधान, गौरव यादव, नितिश यादव, सागर यादव, प्रवीण भाटी, गणपत शर्मा, प्रभु चौधरी, अमित कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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