‘रिश्वत से सब हो जाएगा’ सोच पर हाईकोर्ट का बड़ा वार, बिना सजा नहीं बचेंगे !
इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
“समाज में खतरनाक ट्रेंड”
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
प्रयागराज। रिश्वत और जुगाड़ के सहारे करियर बनाने की सोच पर करारा प्रहार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे मामलों में अब किसी को बख्शा नहीं जाएगा। फर्जी पीएचडी डिग्री और विश्वविद्यालय में नौकरी दिलाने के नाम पर हुई लाखों की ठगी के मामले में अदालत ने एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए कड़ा संदेश दिया है कि अपराधियों को बिना सजा के नहीं छोड़ा जा सकता।
22 लाख में ‘प्रोफेसर’ बनाने का खेल

कानपुर के स्वरूप नगर थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने पीएचडी में दाखिला और विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक महिला से करीब 22 लाख 18 हजार रुपए वसूल लिए।
बदले में पीड़िता को फर्जी पीएचडी डिग्री और नियुक्ति पत्र सौंपे गए। जब वह ज्वॉइनिंग के लिए विश्वविद्यालय पहुंची, तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा-
“समाज में यह डरावना चलन विकसित हो रहा है कि रिश्वत देकर कुछ भी कराया जा सकता है।”
अदालत ने इसे समाज में गिरती नैतिकता का संकेत बताते हुए कहा कि ऐसे अपराधों को दंडित करना आवश्यक है।
कोर्ट का साफ संदेश
पीएचडी डिग्री और विश्वविद्यालय में नौकरी तय प्रक्रिया से ही मिलती है
रिश्वत या ‘जुगाड़’ के जरिए सफलता संभव नहीं
ऐसे मामलों में FIR रद्द करना न्यायोचित नहीं
पुलिस को निष्पक्ष और गहन जांच करनी होगी
FIR रद्द करने से इनकार, जांच के आदेश
अदालत ने कहा कि आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं और ऐसे मामलों में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए। साथ ही आदेश की प्रति संबंधित न्यायिक और पुलिस अधिकारियों को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
