सुप्रीम कोर्ट से अदाणी ग्रुप को बड़ी राहत: जेपी इंफ्राटेक अधिग्रहण पर नहीं लगेगी रोक, वेदांता को झटका
NCLAT में ही होगा अंतिम फैसला
मॉनिटरिंग कमेटी को बड़े निर्णयों से पहले लेनी होगी अनुमति
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विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में अदाणी ग्रुप को बड़ी कानूनी राहत देते हुए जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के अधिग्रहण का रास्ता लगभग साफ कर दिया है। अदालत ने वेदांता की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें अदाणी ग्रुप के रिजॉल्यूशन प्लान के अमल पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने ?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि अधिग्रहण प्रक्रिया पर फिलहाल कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि सभी पक्ष अपनी दलीलें नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के समक्ष रखें, जहां इस मामले की विस्तृत सुनवाई पहले से जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT को निर्देश दिया है कि वह इस विवाद की सुनवाई तेज़ी से पूरी करे। इस मामले की अंतिम सुनवाई प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू होने वाली है।
वेदांता को क्यों लगा झटका ?
वेदांता ने अदाणी ग्रुप के रिजॉल्यूशन प्लान पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए साफ कर दिया कि यह मामला फिलहाल NCLAT के अधिकार क्षेत्र में ही रहेगा। इससे वेदांता को बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
पहले ही मिल चुकी है मंजूरी
अदाणी एंटरप्राइजेज के प्रस्तावित रिजॉल्यूशन प्लान को कर्जदाताओं की समिति (CoC) पहले ही भारी बहुमत से मंजूरी दे चुकी है। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने भी नवंबर में इस योजना को वैध ठहराते हुए हरी झंडी दे दी थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना जेपी इंफ्राटेक के कर्जदाताओं और फंसे हुए प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे व्यवहारिक और ठोस समाधान के रूप में सामने आई है।
पारदर्शिता पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी किसी भी बड़े नीतिगत निर्णय से पहले NCLAT की पूर्व अनुमति लेगी। इस निर्देश को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब इस पूरे विवाद का अंतिम समाधान NCLAT की सुनवाई पर निर्भर करेगा। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप न करने से यह साफ संकेत मिल गया है कि अदाणी ग्रुप की अधिग्रहण प्रक्रिया फिलहाल कानूनी रूप से मजबूत स्थिति में है।
