यूपी पंचायत चुनाव पर सस्पेंस गहराया: आरक्षण और आयोग की रिपोर्ट में देरी से टल सकते हैं चुनाव !

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26 मई को खत्म हो रहा मौजूदा कार्यकाल

हाईकोर्ट की निगरानी में तैयार हो रहा चुनावी रोडमैप

NEWS1UP

पॉलिटिकल डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। 2021 में हुए पिछले पंचायत चुनावों के बाद अब 2026 में नए चुनाव होने हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए समय पर चुनाव होना मुश्किल नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना अधिक है।

दरअसल, पंचायत चुनाव से पहले राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग (ओबीसी कमीशन) का गठन करना है। इसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के लिए आरक्षण तय किया जाएगा। बिना आरक्षण फाइनल हुए चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती, जिससे देरी होना तय माना जा रहा है।

आरक्षण तय करने में लगेगा समय

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में पंचायत स्तर पर आरक्षण निर्धारण एक जटिल प्रक्रिया है। नए गठित होने वाले आयोग को हर जिले में सामाजिक और जनसंख्या आधार पर अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। जब तक यह रिपोर्ट नहीं आती, तब तक ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्यों के पदों पर आरक्षण तय नहीं हो पाएगा।

वहीं, पंचायत चुनाव के लिए फाइनल वोटर लिस्ट 15 अप्रैल को जारी होनी है, लेकिन आरक्षण प्रक्रिया लंबित रहने के कारण चुनाव कार्यक्रम तय होना मुश्किल दिख रहा है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

26 मई को खत्म हो रहा कार्यकाल

राज्य में ग्राम पंचायत की 57,965, क्षेत्र पंचायत की 826 और जिला पंचायत की 75 सीटों पर चुनाव होना है। मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 27 मई 2021 से शुरू हुआ था, जो 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। यदि समय पर चुनाव नहीं होते हैं, तो प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

हाईकोर्ट की नजर में मामला

पंचायत चुनाव में देरी का मुद्दा अब न्यायिक दायरे में भी पहुंच चुका है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने और समय पर चुनाव कराने की संभावनाओं पर जवाब मांगा है। कोर्ट की निगरानी में अब सरकार और आयोग की अगली रणनीति अहम मानी जा रही है।

क्या बोले मंत्री ओमप्रकाश राजभर ?

प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इस मुद्दे पर कहा कि मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है और सरकार कोर्ट के आदेश के अनुसार ही कदम उठाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि जब तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक चुनाव की तारीख तय करना संभव नहीं है।

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