बचाव और उपचार का संतुलन ही बनेगा ‘स्वस्थ भारत’ की असली ताकत: योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को किया संबोधित
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विशेष संवाददाता
लखनऊ, 10 अप्रैल। तेजी से बदलती जीवनशैली और नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच अब भारत की स्वास्थ्य नीति में बड़ा बदलाव स्पष्ट दिख रहा है। केवल इलाज पर आधारित व्यवस्था की जगह अब बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट) के संतुलित मॉडल को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है।”

वे कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि-
बीमार भारत न विकसित हो सकता है, न आत्मनिर्भर बन सकता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि देश को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाना है, तो लोगों की जीवनशैली में सुधार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना अनिवार्य है।
बचाव को बनाना होगा प्राथमिक रणनीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि डायबिटीज, हृदय रोग जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिनका मूल कारण असंतुलित जीवनशैली है। ऐसे में केवल आधुनिक इलाज पर्याप्त नहीं है, समय पर जागरूकता, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या ही इसका स्थायी समाधान दे सकती है।
आयुष्मान भारत बना सुरक्षा कवच
उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना आज देश के करोड़ों लोगों को सालाना 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा दे रही है। साथ ही राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के जरिए उन वर्गों को भी जोड़ा जा रहा है, जो अब तक इससे वंचित थे।
स्वास्थ्य ढांचे में बड़ा विस्तार
प्रदेश में मेडिकल सुविधाओं के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि जहां एक दशक पहले मात्र 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब उनकी संख्या 80 से अधिक हो चुकी है। आईसीयू, कैथ लैब, टेली-आईसीयू और सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का तेजी से विस्तार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बना रहा है।
जीवनशैली और मिलावट बनी बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री ने चेताया कि आज की सबसे बड़ी समस्या खराब खान-पान और अनियमित दिनचर्या है। मिलावटी खाद्य पदार्थ और अत्यधिक स्क्रीन टाइम नई बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि वे समाज को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि डॉक्टरों की सलाह का प्रभाव सबसे अधिक होता है।
‘विकसित भारत’ के लिए स्वस्थ समाज जरूरी
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि “जब तक समाज बीमारियों से मुक्त नहीं होगा, तब तक ‘विकसित भारत’ का सपना अधूरा रहेगा।” उन्होंने देश-विदेश से आए विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे बचाव और उपचार दोनों पहलुओं पर ठोस सुझाव दें, ताकि आने वाले समय में भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा और मजबूत हो सके।

