गौर होम्स सोसाइटी विवाद में हाई कोर्ट सख्त, सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक
मांगा व्यक्तिगत हलफनामा
NEWS1UP
एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क
गाजियाबाद। गोविंदपुरम स्थित गौर होम्स सोसाइटी में एओए से जुड़े विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है और संबंधित पक्ष से जवाब तलब किया है।

सोसायटी निवासी अभिषेक त्यागी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह जानना आवश्यक है कि गाजियाबाद के सिटी मजिस्ट्रेट ने 20 फरवरी 2026 को किस विधिक अधिकार के तहत आदेश पारित किया।
नोटिस को लेकर उठे सवाल
मामले की जड़ 6 नवंबर 2025 को जारी उन नोटिसों से जुड़ी है, जिन्हें पुलिस के माध्यम से तत्कालीन अध्यक्ष मुकेश पाल सिंह और अभिषेक त्यागी को तामील कराया गया था। अभिषेक त्यागी का आरोप है कि उन्हें गलत तरीके से नोटिस भेजा गया, जबकि उस समय वे सोसाइटी के सचिव नहीं थे। उनका कहना है कि वे वर्ष 2023-24 की एओए टीम में सचिव रहे थे, लेकिन नोटिस में उन्हें 2025-26 की कार्यकारिणी का सचिव दर्शाया गया, जो तथ्यों के विपरीत है। उन्होंने इसे प्रशासनिक पद के दुरुपयोग का मामला बताया है।

मामले में अभिषेक त्यागी की याचिका के बाद तत्कालीन एओए अध्यक्ष मुकेश पाल सिंह द्वारा भी सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश दिनांक 20 फरवरी 2026 को चुनौती देते हुए एक अन्य याचिका भी हाई कोर्ट में दायर की गयी थी। सिंह ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि नवनिर्वाचित एओए बोर्ड के पदाधिकारी अतुल त्यागी और कृष्ण पाल बिष्ट द्वारा उन्हें बिना सूचित हुए जबरन ऑफिस में घुसकर सोसायटी सम्बंधित सभी कागजात अपने कब्जे में ले लिए। इस रिट में भी उच्च न्यायालय द्वारा 10 अप्रैल 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को स्थगित करते हुए उनको व्यक्गित हलफनामा दाखिल करने का निर्देश जारी किया है। दोनों ही याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए संबद्ध किया है।
पुलिस जांच का आदेश बना विवाद का कारण
विवाद उस समय और गहरा गया, जब 20 फरवरी 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने सोसाइटी में नई एओए टीम को हैंडओवर से जुड़े मुद्दे पर मुकेश पाल सिंह और अभिषेक त्यागी के खिलाफ आदेश पारित कर दिए। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
हाई कोर्ट के सख्त निर्देश
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 के आदेश को स्थगित (abeyance) कर दिया। राज्य पक्ष से पूछा कि सिटी मजिस्ट्रेट ने यह आदेश किस कानूनी प्रावधान के तहत पारित किया। प्रतिवादी संख्या-4 से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, साथ ही चेतावनी दी कि अनुपालन न होने पर उन्हें स्वयं अदालत में उपस्थित होना होगा।
अगली सुनवाई 16 अप्रैल को
अदालत ने मामले को 16 अप्रैल 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
