न्याय–समता–बंधुता को सीएम योगी ने बताया लोकतंत्र का मूल मंत्र
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भूमेश शर्मा
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि विधायिका लोकतंत्र की आधारशिला है और संविधान के तीन शब्द, न्याय, समता और बंधुता, भारतीय लोकतंत्र की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि विधायिका न केवल कानून निर्माण का मंच है, बल्कि समग्र विकास की कार्ययोजना यहीं से आकार लेती है।
सीएम योगी ने कहा कि देश में लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था अत्यंत मजबूत है और संसद दुनिया के लिए प्रेरणा है। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज सदन तक पहुंचती है। उन्होंने विधानसभा में प्रश्नकाल को संसद की तर्ज पर अधिक प्रभावी बनाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे जनप्रतिनिधियों की सहभागिता और जवाबदेही दोनों बढ़ी हैं।

प्रधानमंत्री के वक्तव्य “भारत लोकतंत्र की जननी है” का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि विविधताओं के बावजूद भारत एक भाव और एक भंगिमा के साथ सोचता-बोलता है। संसद इस राष्ट्रीय आस्था को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में पारित छह प्रस्तावों का स्वागत करते हुए बताया कि ‘विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश’ पर 300 से अधिक सदस्यों ने 24 घंटे तक चर्चा की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल केंद्र का लक्ष्य नहीं, बल्कि इसमें राज्यों और जनप्रतिनिधियों की भी समान भूमिका है।
सीएम योगी ने वर्ष में कम से कम 30 बैठकों के प्रस्ताव को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह संसद, विधानसभा के साथ ही स्थानीय निकायों के लिए भी प्रेरक है। उन्होंने ई-विधान व्यवस्था, पेपरलेस कार्यवाही और तकनीक आधारित प्रशिक्षण को समय की आवश्यकता बताया।
उन्होंने बताया कि ‘विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश’ के लिए पोर्टल पर 98 लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिन्हें आईआईटी कानपुर के सहयोग से एआई टूल के माध्यम से विजन डॉक्यूमेंट का हिस्सा बनाया जा रहा है।
समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पीठासीन अधिकारी उपस्थित रहे।