बढ़ती गर्मी के साथ बढ़ा लिफ्ट हादसों का खतरा, हाईराइज सोसाइटियों में अलर्ट की जरूरत !
44 से 47 डिग्री तापमान के बीच मशीन रूम हीट होने से लिफ्ट फेलियर बढ़ने की आशंका, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। मई-जून की भीषण गर्मी अभी शुरू भी नहीं हुई है, लेकिन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ही तापमान नए रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है। एनसीआर और उत्तर भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 44 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने की चेतावनी दी है।
इस तेज गर्मी के बीच एक और गंभीर समस्या तेजी से सामने आ रही है, हाईराइज आवासीय सोसाइटियों में लिफ्ट खराबी और हादसों का बढ़ता खतरा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद की कई सोसाइटियों से लगातार लिफ्ट रुकने, झटके लगने और लोगों के फंसने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे हजारों परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
NEWS1UP द्वारा दर्जनों सोसाइटियों का दौरा कर तकनीकी विशेषज्ञों और विद्युत सुरक्षा विभाग के अधिकारियों से बातचीत की गई, जिसमें कई अहम तथ्य सामने आए।
गर्मी में क्यों बढ़ती है लिफ्ट खराबी ?

लिफ्ट तकनीकी विशेषज्ञ राजेश मिश्रा (VERTIX) बताते हैं कि गर्मी के मौसम में मशीन रूम और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स का तापमान तेजी से बढ़ जाता है। अधिक तापमान के कारण कंट्रोल सिस्टम हैंग होने लगता है और लिफ्ट कमांड के अनुसार काम नहीं करती।
उनके अनुसार मशीन रूम में पर्याप्त वेंटिलेशन होना बेहद जरूरी है। नियमों के मुताबिक वहां मजबूत एग्जॉस्ट फैन और लगभग एक टन क्षमता का एयर कंडीशनर होना चाहिए, ताकि उपकरण सामान्य तापमान पर कार्य कर सकें।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट एक तय सीमा तक ही सही काम करते हैं। तापमान बढ़ने पर वे अचानक बंद हो सकते हैं, जिससे लिफ्ट झटके लेकर दो मंजिलों के बीच रुक जाती है। ऐसे समय में लोग घबरा जाते हैं और बुजुर्गों के लिए स्थिति और खतरनाक हो सकती है। कई मामलों में हार्ट अटैक जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। यदि एक समय पर पुराने हो चुके कंपोनेंट्स को न बदला जाए तो गंभीर हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
फ्लेक्चुएशन और ARD फेल होना सबसे बड़ा खतरा
राजेश मिश्रा के अनुसार गर्मियों में बिजली का आना-जाना और वोल्टेज फ्लेक्चुएशन भी बड़ी समस्या है। इससे ARD (Automatic Rescue Device) काम करना बंद कर सकती है। ARD वह सिस्टम है जो बिजली जाने पर लिफ्ट को नजदीकी फ्लोर तक पहुंचाता है। यदि यह फेल हो जाए तो लिफ्ट बीच में रुक सकती है।
उन्होंने कहा कि समय पर मेंटेनेंस, ARD की नियमित जांच और सही टाइमर लगाना बेहद जरूरी है। यदि एक समय पर पुराने हो चुके कंपोनेंट्स को न बदला जाए तो गंभीर हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
रेस्क्यू के दौरान होते हैं कई गंभीर हादसे

मिश्रा का कहना है कि लिफ्ट से जुड़े कई गंभीर हादसे सीधे खराबी के कारण नहीं, बल्कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान होते हैं। कई बार बिना तकनीकी जानकारी के सुरक्षा गार्ड, अनट्रेंड स्टाफ या स्थानीय लोग फंसे हुए व्यक्तियों को निकालने का प्रयास करते हैं, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
ऐसी स्थिति में लिफ्ट अचानक चल पड़ना, दरवाजा लॉक हो जाना, केबिन का असंतुलित होना या व्यक्ति के गिरने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसलिए सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड, मेंटेनेंस टीम, तकनीकी स्टाफ और प्रबंधन कर्मियों को प्रॉपर रेस्क्यू ट्रेनिंग देना बेहद जरूरी है। समय-समय पर मॉक ड्रिल और आपातकालीन अभ्यास भी कराए जाने चाहिए।
छोटी खराबियों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि लिफ्ट में बड़ी खराबी अचानक नहीं आती। पहले छोटे संकेत मिलते हैं, जैसे हल्की आवाज आना, डिस्प्ले खराब होना, झटका लगना या दरवाजा अटकना। निवासी अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
हर लिफ्ट में मेंटेनेंस एजेंसी के नंबर लगे होते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज करनी चाहिए और सोसाइटी प्रबंधन या AOA को भी सूचित करना चाहिए।
गाजियाबाद में 5000 से ज्यादा लिफ्ट, लेकिन सिर्फ 3012 रजिस्टर्ड

विद्युत सुरक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक इंजीनियर सौरभ कुमार सिंह ने बताया कि गाजियाबाद में अब तक 3012 लिफ्ट रजिस्टर्ड हैं, जबकि अनुमानित रूप से जिले में 5000 से अधिक लिफ्ट संचालित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश लिफ्ट एवं एस्केलेटर अधिनियम 2024 के तहत सभी लिफ्टों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। जिन सोसाइटियों, अस्पतालों, स्कूलों, मॉल्स या अन्य संस्थानों ने अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए लिफ्ट इंश्योरेंस, AMC और एफिडेविट जमा करना होगा। अब विलंब होने पर 10 हजार रुपये की पेनल्टी भी देनी पड़ेगी।
ऑपरेटर और सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी
सौरभ कुमार सिंह ने बताया कि स्पीड गवर्नर सुरक्षा मानकों के तहत कई स्थानों पर ऑपरेटर की व्यवस्था आवश्यक है। साथ ही ARD के लिए 30 सेकंड से 1 मिनट का टाइमर होना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में लिफ्ट सुरक्षित फ्लोर तक पहुंच सके।
अब चेतने का समय
गर्मी अभी और बढ़नी बाकी है। ऐसे में हाईराइज सोसाइटियों, बिल्डरों, AOA और प्रबंधन समितियों को तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। समय पर सर्विसिंग, मशीन रूम कूलिंग, रजिस्ट्रेशन, रेस्क्यू ट्रेनिंग और सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में लिफ्ट हादसे बढ़ सकते हैं।

