भारत-न्यूजीलैंड FTA: किसानों की सुरक्षा, उद्योगों को रफ्तार
भारत ने कैसे साधा ‘बैलेंस गेम’ ?
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर हो गए। पहली नजर में यह समझौता व्यापार बढ़ाने की पहल लगता है, लेकिन असल में भारत ने इसमें एक ऐसा संतुलन बनाया है, जहां घरेलू किसानों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी की गई है और उद्योगों के लिए नए अवसर भी खोले गए हैं। यही वजह है कि इस डील को भारत की “स्मार्ट ट्रेड रणनीति” माना जा रहा है।
समझौते पर भारत के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
भारत को क्या बड़ा फायदा मिलेगा ?
इस समझौते के तहत भारत के 100 फीसदी निर्यात को न्यूजीलैंड में टैरिफ-फ्री पहुंच मिलेगी। यानी भारतीय वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पाद अब वहां बिना अतिरिक्त टैक्स के बिक सकेंगे। इससे भारतीय सामान दूसरे देशों के मुकाबले सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनेगा।
अब तक न्यूजीलैंड सिरेमिक, कालीन, मोटर वाहन और उनके कलपुर्जों जैसे भारतीय उत्पादों पर 10 फीसदी तक शुल्क लगाता था। यह बाधा अब खत्म हो जाएगी।

किसानों और डेयरी सेक्टर को राहत
इस FTA की सबसे खास बात यह है कि भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। भारत ने दूध, क्रीम, पनीर जैसे डेयरी उत्पादों, प्याज, चना, मटर, मक्का, चीनी और कई कृषि उत्पादों को शुल्क रियायत से बाहर रखा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, न्यूजीलैंड दुनिया के बड़े डेयरी निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में यदि भारत ने डेयरी बाजार खोल दिया होता तो घरेलू किसानों पर दबाव बढ़ सकता था।
उद्योगों को सस्ता कच्चा माल
भारत को इस समझौते से लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला और धातुओं का कबाड़ जैसे कच्चे माल शुल्क-मुक्त मिलेंगे। इससे स्टील, निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत घटेगी और निर्यात क्षमता मजबूत होगी।
न्यूजीलैंड को क्या मिला ?
भारत ने करीब 70 फीसदी शुल्क श्रेणियों में रियायत देने पर सहमति जताई है, जिनकी व्यापार हिस्सेदारी 95 फीसदी है। न्यूजीलैंड की वाइन, दवाएं, पॉलिमर, एल्युमिनियम और स्टील उत्पादों को भारतीय बाजार में राहत मिलेगी।
हालांकि मनुका शहद, सेब और कीवी जैसे उत्पाद कोटा प्रणाली के तहत आएंगे, यानी नियंत्रित मात्रा में ही फायदा मिलेगा।
20 अरब डॉलर निवेश का रास्ता
इस समझौते में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश को आसान बनाने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। खास बात यह है कि अगर निवेश लक्ष्य पूरे नहीं होते, तो संतुलन बनाने के लिए “रीबैलेंसिंग क्लॉज” भी जोड़ा गया है।
क्यों खास है यह डील ?
2024 में भारत-न्यूजीलैंड के बीच कुल व्यापार 2.4 अरब डॉलर रहा था। ऐसे में यह समझौता सिर्फ व्यापार बढ़ाने की पहल नहीं, बल्कि भारत की नई रणनीति का संकेत है, जहां देश बाजार भी खोल रहा है, लेकिन अपने किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के साथ।
