दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बाइक-ऑटो बैन! 100 की रफ्तार पार करते ही कटेगा चालान
NEWS1UP
प्रभात अरोड़ा
नई दिल्ली। दिल्ली से देहरादून तक सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत देने वाला दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब आम जनता के लिए खोल दिया गया है। इस हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आई है और अब लोग कुछ ही घंटों में यह दूरी तय कर सकेंगे।
हालांकि, यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने इस एक्सप्रेसवे पर कई सख्त नियम लागू किए हैं। तेज रफ्तार वाहनों के लिए बनाए गए इस मार्ग पर धीमी गति वाले वाहनों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है।
किन वाहनों पर लगी पूरी तरह रोक ?
प्रशासन के अनुसार, बाइक, ऑटो रिक्शा और ट्रैक्टर जैसे धीमी रफ्तार वाले वाहनों को एक्सप्रेसवे पर चलाने की अनुमति नहीं दी गई है। खासतौर पर बड़गांव इंटरचेंज पर पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि कोई प्रतिबंधित वाहन इस मार्ग पर प्रवेश न कर सके।
अधिकारियों का कहना है कि हाई-स्पीड रोड पर धीमी गाड़ियों के आने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए यह फैसला सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।
क्या है स्पीड लिमिट ?

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग वाहनों के लिए स्पीड लिमिट तय की है-
कारों के लिए अधिकतम रफ्तार:- 100 किमी प्रति घंटा
बस और ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए:- 80 किमी प्रति घंटा
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हाईटेक कैमरों से होगी निगरानी
एक्सप्रेसवे पर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यहां ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) और VSDS (व्हीकल स्पीड डिटेक्शन सिस्टम) लगाए गए हैं, जो हर वाहन की स्पीड और नंबर प्लेट पर नजर रखेंगे।
यदि कोई वाहन निर्धारित सीमा से ज्यादा रफ्तार में चलता है, तो सिस्टम स्वतः ई-चालान जारी कर देगा। इसके अलावा CCTV कैमरे सीट बेल्ट न पहनने, नाबालिग ड्राइविंग और अन्य ट्रैफिक उल्लंघनों पर भी नजर रखेंगे।
जल्द शुरू होगा टोल सिस्टम
अधिकारियों ने जानकारी दी है कि इस एक्सप्रेसवे पर जल्द ही टोल कलेक्शन सिस्टम भी पूरी तरह शुरू कर दिया जाएगा। इससे ट्रैफिक मैनेजमेंट बेहतर होगा और यात्रियों को और सुविधाजनक सफर मिलेगा।
12,000 करोड़ की लागत से तैयार हुआ प्रोजेक्ट

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को किया था। करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट से दिल्ली और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिली है।
अब यात्रियों को कम समय में सुरक्षित, तेज और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।
