गौर कैस्केड्स: सदस्यता विवाद में पूर्व सचिव को राहत, शिकायतकर्ता असहमत
NEWS1UP May 2, 2026 0
डिप्टी रजिस्ट्रार ने NOC समयरेखा और बोर्ड निर्णय को माना निर्णायक
फैसले के बाद नियम बनाम राहत पर बड़ी बहस
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भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित गौर कैस्केड्स सोसाइटी में अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) की सदस्यता को लेकर चला आ रहा विवाद डिप्टी रजिस्ट्रार के फैसले के साथ एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार ने अपने आदेश में पूर्व सचिव पुनीत गोयल की सदस्यता और उनके पद पर बने रहने को वैध ठहराया है। हालांकि शिकायतकर्ता एवं वर्तमान बोर्ड अध्यक्ष संजीव मलिक ने इस निर्णय पर असहमति जताते हुए आगे की कार्रवाई के विकल्पों पर विचार करने की बात कही है।

विवाद की पृष्ठभूमि
मामले की शुरुआत 3 फरवरी 2026 को हुई, जब संजीव मलिक (तत्कालीन बोर्ड सदस्य) ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि पुनीत गोयल ने 21 नवंबर 2025 को अपना फ्लैट (H-358) बेच दिया था। उनके अनुसार, फ्लैट स्वामित्व समाप्त होते ही AOA की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है, ऐसे में गोयल का सचिव पद पर बने रहना नियमों के विपरीत था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि उक्त अवधि के दौरान उन्होंने सचिव के रूप में कार्य करते हुए सोसाइटी के कामकाज का संचालन किया, जो नियमों के अनुरूप नहीं था।
पूर्व सचिव का पक्ष

पुनीत गोयल ने अपने जवाब में कहा कि उन्होंने 28 नवंबर 2025 को उसी सोसाइटी में फ्लैट संख्या A-1504 खरीद लिया था। उनके अनुसार, यह मामला सोसाइटी के भीतर ही एक फ्लैट से दूसरे फ्लैट में स्थानांतरण का है और सदस्यता की निरंतरता बनी रही।
उन्होंने यह भी बताया कि 7 फरवरी 2026 को आयोजित बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर विचार किया गया। बैठक में 21 नवंबर 2025 के बाद सदस्य बने रहने को “तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक त्रुटि” माना गया। इसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से सचिव पद से इस्तीफा दिया, जिसे स्वीकार करते हुए नए फ्लैट के आधार पर उनकी सदस्यता मान्य की गई और उन्हें पुनः सचिव निर्वाचित किया गया।
सुनवाई और प्रस्तुत तर्क
मामले की सुनवाई पहले 12 मार्च 2026 को निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में 18 मार्च 2026 को सुना गया। दोनों पक्षों को अपने-अपने लिखित कथन प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया।
संजीव मलिक का तर्क-
AOA सदस्यता का आधार फ्लैट स्वामित्व है, इसलिए स्वामित्व समाप्त होने के बाद सदस्य और पदाधिकारी बने रहना नियमों के विरुद्ध है।
पुनीत गोयल का पक्ष-
उन्होंने दोनों फ्लैट्स की NOC प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि नए फ्लैट (A-1504) की NOC 28 नवंबर 2025 को जारी हुई, जबकि पुराने फ्लैट (H-358) की NOC 17 दिसंबर 2025 को जारी हुई।
डिप्टी रजिस्ट्रार का निर्णय

डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार ने अपने आदेश में NOC समयरेखा और 7 फरवरी 2026 की बोर्ड बैठक की कार्यवाही को महत्वपूर्ण आधार माना। उन्होंने पाया कि पुनीत गोयल ने पुराने फ्लैट की NOC जारी होने से पहले ही नया फ्लैट खरीद लिया था और सदस्यता ले ली थी।
इसी आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि सदस्यता की निरंतरता बनी रही और प्रक्रियात्मक त्रुटि को बोर्ड स्तर पर सुधार लिया गया। परिणामस्वरूप, पुनीत गोयल की सदस्यता और उनके सचिव पद को वैध माना गया।
फैसले से उठे सवाल
हालांकि इस निर्णय ने विवाद के निस्तारण का रास्ता दिखाया है, लेकिन इसके साथ कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने आए हैं-
यदि सदस्यता का आधार फ्लैट स्वामित्व है, तो 21 नवंबर से 28 नवंबर के बीच की अवधि को कैसे देखा जाए ?
जब बोर्ड बैठक में स्वयं इसे “तकनीकी त्रुटि” माना गया, तो क्या यह केवल प्रक्रियात्मक चूक थी या नियमों की व्याख्या का मामला ?
इस्तीफा देकर उसी बैठक में पुनः सचिव चुने जाने की प्रक्रिया क्या बायलॉज के अनुरूप थी ?
NOC जारी होने की तिथियों में अंतर, क्या इसकी जांच में प्रक्रिया की पारदर्शिता पर पर्याप्त ध्यान दिया गया ?
भारत में फ्लैट हस्तांतरण में उप निबंधक के यहाँ हुई रजिस्ट्री वैधानिक, निर्णायक और अंतिम दस्तावेज या स्थानीय एओए द्वारा जारी NOC ?
क्या यह निर्णय स्पष्ट बायलॉज प्रावधानों पर आधारित है या प्रशासनिक विवेक पर ?
इन सवालों के कारण यह मामला केवल एक सोसाइटी विवाद तक सीमित न रहकर AOA सदस्यता नियमों की व्याख्या पर व्यापक बहस का विषय बन गया है। फैसले के बाद पुनीत गोयल ने इसे अपने पक्ष में आया निर्णय बताया है और इसे सत्य की जीत करार दिया है जबकि संजीव मलिक ने आदेश से असहमति जताते हुए आगे कार्रवाई की संभावना व्यक्त की है।
डिप्टी रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में सोसाइटी को पंजीकृत मॉडल बायलॉज के अनुपालन का निर्देश भी दिया है, जिससे भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके।
इस पूरे प्रकरण ने सोसाइटी प्रबंधन, सदस्यता की शर्तों और प्रक्रियात्मक पारदर्शिता को लेकर कई अहम पहलुओं को उजागर कर दिया है।
