200वां हिंदी पत्रकारिता दिवस: पत्रकारिता को ‘व्यूज’ नहीं ‘वैल्यूज’ से जोड़ने पर जोर
नोएडा में “200वां हिंदी पत्रकारिता दिवस एवं देवर्षि नारद जयंती समारोह” संपन्न
देवर्षि नारद को बताया पहला संवादवाहक
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नोएडा। प्रेरणा शोध संस्थान न्यास एवं राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के संयुक्त तत्वावधान में “200वां हिंदी पत्रकारिता दिवस एवं देवर्षि नारद जयंती समारोह” का आयोजन सेक्टर-62 स्थित कल्याण सिंह सभागार में भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में पत्रकारिता के मूल्यों, बदलते मीडिया परिदृश्य और देवर्षि नारद की भूमिका पर व्यापक चर्चा की गई।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, डीडी न्यूज़ की वरिष्ठ सलाहकार संपादक श्रीमती रीमा पाराशर ने अपने संबोधन में कहा कि देवर्षि नारद को लंबे समय तक हास्य पात्र के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वे वास्तव में ज्ञान और सूचनाओं के सशक्त वाहक थे। उन्होंने कहा कि आज के एआई युग में पत्रकारों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है, जहां केवल सूचना देना नहीं, बल्कि संवेदनशील और सत्य संदेश पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि-
विभिन्न सामाजिक संगठनों के बारे में गलत नैरेटिव गढ़े गए, जबकि आपदाओं के समय निस्वार्थ सेवा करने वाले स्वयंसेवकों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अमर उजाला ग्रुप के समूह सलाहकार संपादक उदय कुमार ने पत्रकारिता के मूल स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवर्षि नारद की पत्रकारिता ‘सत्यम्, शिवम्, सुंदरम्’ के सिद्धांतों पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि मनोरंजन के नाम पर धार्मिक पात्रों की छवि को विकृत किया गया, जिससे नारद जी को चुगली के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर दिया गया।
उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि 200 वर्ष पूर्व ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन के साथ हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी, जो सीमित संसाधनों के बावजूद एक साहसिक प्रयास था।
उन्होंने चिंता जताई कि-
आज सूचना की अधिकता है, लेकिन ज्ञान का अभाव है। उनके अनुसार पत्रकारिता का उद्देश्य ‘व्यूज’ नहीं, बल्कि ‘वैल्यूज’ होना चाहिए।

मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख श्री कृपाशंकर ने पत्रकारिता के मूल धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्य, स्वाधीनता और समाज-जागरण ही पत्रकारिता की आधारशिला हैं।
उन्होंने देवर्षि नारद को ब्रह्मांड का पहला पत्रकार बताते हुए कहा कि वे तीनों लोकों में जाकर संवाद स्थापित करते थे और उनका उद्देश्य धर्म की रक्षा तथा सामाजिक संतुलन बनाए रखना था।
कार्यक्रम में देशभर से आए पत्रकारों, संवाददाताओं, ब्लॉगर, इंफ्लुएंसर्स और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित 250 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
समारोह के अंत में एनआईओएस के अध्यक्ष प्रोफेसर अखिलेश मिश्र ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
