UP: अब MLA-MP का फोन नहीं उठाया तो होगी कार्रवाई, खड़े होकर करना होगा स्वागत

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16वीं बार आदेश, अफसरों को करना होगा VIP प्रोटोकॉल फॉलो

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी अफसरों और कर्मचारियों के लिए बड़ा और सख्त आदेश जारी किया गया है। अब राज्य के सभी सरकारी दफ्तरों में सांसदों और विधायकों को विशेष प्रोटोकॉल के तहत सम्मान देना अनिवार्य होगा। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी ने जनप्रतिनिधियों के साथ तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया, तो उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत कार्रवाई की जाएगी।

एसपी गोयल, मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश

यूपी के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल की ओर से जारी शासनादेश में साफ निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी अधिकारी सांसदों और विधायकों का दफ्तरों में खड़े होकर स्वागत करें, उनसे पानी पूछें और सम्मानपूर्वक विदा करें। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों के फोन रिसीव करना भी अब अनिवार्य कर दिया गया है।

फोन नहीं उठाया तो देना होगा जवाब

नए आदेश के मुताबिक सभी अधिकारियों को अपने मोबाइल फोन में सांसदों और विधायकों के नंबर सेव रखने होंगे। यदि किसी कारणवश कॉल रिसीव नहीं हो पाती है, तो अधिकारी को तुरंत मैसेज भेजना होगा और बाद में कॉल बैक करना होगा। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों की समस्याओं और शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।

2017 से अब तक 15 बार जारी हो चुके आदेश

मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि वर्ष 2017 से फरवरी 2026 तक सांसदों और विधायकों के सम्मान और प्रोटोकॉल को लेकर 15 शासनादेश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते और उन्हें उचित सम्मान नहीं देते।

विधानसभा तक पहुंच चुका था मामला

सूत्रों के अनुसार, कई सांसदों और विधायकों ने शिकायत की थी कि अधिकारी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते। यह मुद्दा उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका था। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद आखिरकार सरकार को सख्त रुख अपनाना पड़ा।

आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

सरकार के इस फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अब अधिकारियों और कर्मचारियों पर जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहार को लेकर अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर नौकरशाही पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने के आरोप भी लगा सकता है।

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