राजनीतिक और जातीय समीकरण साधने की तैयारी, कई दिग्गज विधायकों के नाम चर्चा में
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सत्ता के गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द अपनी टीम का विस्तार कर सकते हैं। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिनों में छह विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है।
खाली पदों को भरने की तैयारी
लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश सरकार में कुछ पद खाली हुए थे। पूर्व कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद और पूर्व राज्यमंत्री अनूप प्रधान वाल्मीकि सांसद चुने जा चुके हैं। इसके बाद योगी सरकार में मंत्रियों की संख्या घटकर 54 रह गई है, जबकि नियमों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में लंबे समय से कैबिनेट विस्तार की अटकलें लगाई जा रही थीं।
सूत्रों की मानें तो इस बार किसी मौजूदा मंत्री को हटाने की संभावना कम है। पार्टी नेतृत्व केवल नए चेहरों को शामिल कर राजनीतिक और सामाजिक समीकरण मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
मनोज पांडेय और पूजा पाल चर्चा में
राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने वाले कुछ विधायकों को अब इसका लाभ मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में मनोज पांडे और पूजा पाल के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में बताए जा रहे हैं।
मनोज पांडेय को ब्राह्मण चेहरे के रूप में देखा जाता है, जबकि पूजा पाल पिछड़ा वर्ग की राजनीति में प्रभाव रखने वाली नेता मानी जाती हैं। ऐसे में बीजेपी आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही है।
पूजा पाल का राजनीतिक सफर फिर सुर्खियों में
पूजा पाल
इलाहाबाद के चर्चित राजू पाल हत्याकांड के बाद राजनीति में सक्रिय हुईं पूजा पाल ने वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा था। हालांकि राज्यसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के समर्थन में मतदान किया था। इसके बाद उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ भी खुलकर बयान दिए थे। बाद में समाजवादी पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था।
भूपेंद्र चौधरी समेत कई नामों की चर्चा
सूत्रों के अनुसार बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। इसके अलावा कृष्णा पासवान और अशोक कटारिया के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है।
2027 चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक संकेत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल में यह दूसरा बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार माना जा रहा है। इससे पहले मार्च 2024 में कैबिनेट का विस्तार किया गया था। अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नए सामाजिक समीकरण साधने में जुटी हुई है। ऐसे में यह विस्तार राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।