मेंटिनेंस नहीं दिया तो भी नहीं कटेगी बिजली ! गाजियाबाद की सोसाइटियां विवाद की कगार पर
बिजली विभाग के आदेश से मची हलचल, फेडरेशन ने कहा तुरंत वापस लें आदेश
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता प्रथम पवन कुमार गोयल के एक आदेश ने शहर की हाईराइज सोसायटियों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। बीती 11 अप्रैल को जारी आदेश में साफ कहा गया है कि बिल्डर और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) अब प्रीपेड बिजली मीटरों के जरिए निवासियों से मेंटिनेंस शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। प्रीपेड बैलेंस का उपयोग केवल बिजली खपत के भुगतान के लिए ही किया जाएगा।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि लिफ्ट, पानी के पंप, कॉमन एरिया लाइटिंग समेत बिजली उपयोग का हिसाब अलग से दिया जाए और मेंटिनेंस बकाया होने पर किसी भी फ्लैट की बिजली न काटी जाए।
मेंटिनेंस के नाम पर बिजली काटने पर सख्ती
मुख्य अभियंता ने माना है कि कई सोसायटियों में मेंटिनेंस जमा न होने पर बिल्डर और एओए प्रीपेड मीटर बंद कर निवासियों की बिजली बाधित कर देते हैं। इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए सभी क्षेत्रीय अभियंताओं को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में कहा गया है कि यदि कोई बिल्डर या एओए नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ यूपीईआरसी एक्ट के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
एओए बोली- इससे बिगड़ जाएगी पूरी व्यवस्था
इस आदेश के बाद कई सोसायटियों के एओए पदाधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
महागुनपुरम सोसायटी के पूर्व एओए अध्यक्ष आईसी जिंदल का कहना है कि-

यदि प्रीपेड मीटरों से मेंटिनेंस वसूली बंद हुई तो हाईराइज सोसायटियों की पूरी व्यवस्था चरमरा सकती है।
उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोग हैं जो जानबूझकर मेंटिनेंस नहीं देंगे और इसका असर सुरक्षा, सफाई, लिफ्ट संचालन और अन्य जरूरी सेवाओं पर पड़ेगा।
बिना एओए से बात किए लिया गया फैसला
एनएच-9 स्थित लैंडक्राफ्ट सोसायटी के पूर्व एओए अध्यक्ष एस.के. भटनागर ने आदेश को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया। उनका कहना है कि विभाग को पहले एओए प्रतिनिधियों से चर्चा करनी चाहिए थी।
भटनागर के मुताबिक-

कई निवासी इस आदेश का गलत फायदा उठाकर मेंटिनेंस देना बंद कर सकते हैं, जिससे सोसायटियों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।
फेडरेशन ने मांगी बैठक
फ्लैट ओनर्स फेडरेशन ने भी मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। फेडरेशन ने मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर आदेश को फौरन वापस लेने की अपील की है और बैठक का प्रस्ताव भेजा है। फेडरेशन का कहना है कि बिजली उपभोक्ताओं के अधिकार जरूरी हैं, लेकिन सोसायटियों के संचालन की वास्तविक चुनौतियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
