महागुनपुरम में विशाल हिन्दू सम्मेलन, समरसता और संस्कृति का संदेश!

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धर्म-कर्म डेस्क

गाजियाबाद। एन एच 9 स्थित महागुनपुरम सोसाइटी में रविवार को आयोजित “विशाल हिन्दू सम्मेलन” क्षेत्रीय सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली अध्याय के रूप में दर्ज हुआ। सम्मेलन में महागुनपुरम, तनुश्री एवं जैस्मीन सोसायटी के नागरिकों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। मातृशक्ति, युवाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने आयोजन को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।

सम्मेलन का मूल उद्देश्य सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना, सांस्कृतिक चेतना का जागरण तथा सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश जन-जन तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों की नि:स्वार्थ सहभागिता ने यह साफ कर दिया कि सांस्कृतिक एकता आज भी समाज की सबसे बड़ी ताकत है।

कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा तैयार की गई भारतीय संस्कृति और महापुरुषों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी से हुई। इन चित्रों ने न केवल बच्चों की रचनात्मकता को उजागर किया, बल्कि उनमें राष्ट्रबोध और संस्कार भावना के बीज भी रोपे। इसके साथ ही हिंदुत्व एवं सनातन मूल्यों, चरित्र निर्माण और नैतिक जीवन पर केंद्रित पुस्तकों की प्रदर्शनी एवं वितरण किया गया, जिसे नागरिकों ने विशेष रुचि के साथ देखा।

इस्कॉन मंदिर से पधारे संगीतज्ञों द्वारा प्रस्तुत भजन-कीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। वहीं बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से शिवाजी-औरंगज़ेब पर आधारित लघु नाटिका ने इतिहास, साहस और राष्ट्रस्वाभिमान का सशक्त संदेश दिया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने तालियों के साथ सराहा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थानीय प्रचार प्रमुख ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में समाज, राष्ट्र और संस्कृति के प्रति नागरिक दायित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सशक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण और विचार से राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे।

ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, गाजियाबाद की प्रधान बहन जी ने मातृशक्ति को संबोधित करते हुए नैतिक, आत्मिक एवं मानसिक सशक्तिकरण पर बल दिया और महिलाओं की भूमिका को समाज की रीढ़ बताया।

हिंदू आयोजन समिति के अध्यक्ष अवधेश ने अपने अभिवादन संदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गैर-राजनीतिक, सामाजिक-सांस्कृतिक स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि संघ का लक्ष्य सत्ता नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव, समरसता और चरित्र निर्माण को सुदृढ़ करना है।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ, जिसके बाद आयोजन की सफलता की औपचारिक घोषणा की गई। कुल मिलाकर, यह विशाल हिन्दू सम्मेलन क्षेत्र में सांस्कृतिक जागरण, सामाजिक एकता और राष्ट्रभाव को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक और प्रभावशाली प्रयास के रूप में सामने आया।

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