गाजियाबाद में बिजली संकट बेकाबू: आधी रात सड़कों पर उतरे लोग, जनरेटर भी हुए फेल
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लो-वोल्टेज और कटौती ने बढ़ाई शहरवासियों की मुश्किलें
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। शहर इस समय भीषण गर्मी और अघोषित बिजली कटौती की दोहरी मार झेल रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। शहर के कई इलाकों में 10 से 12 घंटे तक बिजली गुल रहने, लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब पॉश कॉलोनियां और हाईराइज सोसायटियां भी बिजली संकट से अछूती नहीं रहीं।
आधी रात को सड़कों पर उतरे लोग
बीती रात शहर के कई इलाकों में लोगों ने बिजली कटौती के विरोध में प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतरकर बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कुछ जगहों पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। लोगों का कहना है कि दिनभर उमस और 43 डिग्री के पार पहुंच चुके तापमान के बीच घंटों बिजली गायब रहने से घरों में रहना मुश्किल हो गया है।
सोसायटियों के जनरेटर भी हांफने लगे
राजनगर एक्सटेंशन, इंदिरापुरम, क्रॉसिंग रिपब्लिक और एन.एच.-24 स्थित हाईराइज सोसायटियों में हालात बेहद गंभीर बताए जा रहे हैं। लगातार बिजली कटौती के कारण सोसायटियों के डीजी सेट और जनरेटर पर अत्यधिक लोड बढ़ गया है। कई स्थानों पर जनरेटर बीच-बीच में बंद हो रहे हैं और पूरी क्षमता से लोड नहीं उठा पा रहे। सोसायटियों के प्रबंधन लगातार जनरेटर के माध्यम से बिजली आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अत्यधिक दबाव के चलते व्यवस्था बार-बार चरमरा रही है। बिजली कटौती का असर सोसायटियों के लिफ्ट संचालन पर भी पड़ रहा है।
पॉश कॉलोनियों का भी बुरा हाल
वहीं दूसरी ओर राजनगर, कविनगर, शास्त्री नगर, नेहरू नगर और विजय नगर जैसी कॉलोनियों में भी बिजली संकट ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इन इलाकों में घंटों बिजली गुल रहने, लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या से लोग बेहाल हैं। कई कॉलोनियों में पानी की सप्लाई भी प्रभावित होने लगी है, क्योंकि मोटर और पंप बिजली पर निर्भर हैं। बिजली कटौती का असर सोसायटियों के लिफ्ट संचालन पर भी पड़ रहा है।
बिजली विभाग और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बढ़ा आक्रोश
स्थानीय निवासियों में बिजली विभाग के प्रति भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर न तो फोन उठाए जा रहे हैं और न ही समय पर समाधान किया जा रहा है। वहीं जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई क्षेत्रों के निवासियों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता की समस्या सुनने तक को तैयार नहीं हैं।
बढ़ती गर्मी ने बढ़ाया संकट
जानकारी के अनुसार भीषण गर्मी के चलते एसी, कूलर और अन्य उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 29 हजार मेगावाट के करीब पहुंच चुकी है, जबकि सप्लाई और वितरण व्यवस्था इस दबाव को संभाल नहीं पा रही। इसका सीधा असर गाजियाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों पर दिखाई दे रहा है।
ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड और लो-वोल्टेज बनी बड़ी समस्या
शहर के कई इलाकों में ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। लो-वोल्टेज के कारण लोगों के घरेलू उपकरण खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। कई स्थानों पर फ्यूज उड़ने और लाइन ट्रिप होने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रातभर बिजली आने-जाने का सिलसिला जारी रहता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्रशासन अलर्ट मोड में, लेकिन राहत का इंतजार
प्रदेश सरकार ने बिजली संकट को लेकर अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्पतालों, पेयजल व्यवस्था और बिजली आपूर्ति की लगातार निगरानी करने के आदेश दिए हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर लोगों को अब तक राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही।
