गंगा एक्सप्रेसवे: माल ढुलाई में हर साल 30 हजार करोड़ रुपये तक की बचत का अनुमान !
मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स भविष्य की नई धुरी बनकर उभर रहा है।
तेज रफ्तार, सुगम सफर और कम परिवहन लागत के कारण यह एक्सप्रेसवे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने वाला माना जा रहा है
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
उत्तर प्रदेश में तैयार हुआ गंगा एक्सप्रेसवे अब केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राज्य की औद्योगिक, व्यापारिक और लॉजिस्टिक्स संरचना में बड़ा बदलाव लाने जा रहा है। मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला यह छह लेन का एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। लगभग 594 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक गलियारे के रूप में देखा जा रहा है।
एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर दावा किया जा रहा है कि सड़क इतनी समतल और आधुनिक तकनीक से तैयार की गई है कि वाहन में रखा पानी तक नहीं हिले। यही कारण है कि भारी वाहनों की आवाजाही अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुरक्षित हो सकेगी। इससे समय की बचत के साथ-साथ परिवहन लागत में भी भारी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
माल ढुलाई व्यवस्था में आएगा बड़ा बदलाव
औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश में माल परिवहन की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। वर्तमान में प्रदेश के भीतर हर साल करोड़ों टन अनाज, निर्माण सामग्री, उपभोक्ता वस्तुएं और अन्य उत्पादों की ढुलाई होती है, जबकि राज्य से बाहर इलेक्ट्रॉनिक्स, चमड़ा, कृषि उत्पाद और औद्योगिक सामान बड़े पैमाने पर भेजे जाते हैं।
अब तक लंबी दूरी, खराब संपर्क मार्ग और अधिक यात्रा समय के कारण उद्योगों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता था। लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे के संचालन से यह लागत काफी कम हो सकती है। सरकारी अनुमान के अनुसार परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च में हर साल 25 से 30 हजार करोड़ रुपये तक की बचत संभव है।

औद्योगिक निवेश को मिलेगा बढ़ावा
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। सरकार को इस कॉरिडोर से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक नोड, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और ई-कॉमर्स हब विकसित किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और वेयरहाउसिंग क्षेत्र को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
NCR से पूर्वांचल तक बनेगा सीधा संपर्क
लॉजिस्टिक्स कंपनियों के अनुसार अब तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच निर्बाध सड़क संपर्क की कमी महसूस की जाती थी। गंगा एक्सप्रेसवे इस दूरी को कम करेगा और माल परिवहन को तेज बनाएगा। खासकर ई-कॉमर्स, कृषि उत्पाद, दवा उद्योग और तेजी से खराब होने वाली वस्तुओं की सप्लाई अब अधिक समयबद्ध तरीके से हो सकेगी।
इसके साथ ही एयर कार्गो नेटवर्क और अन्य माल ढुलाई गलियारों से संपर्क भी मजबूत होगा। उद्योग जगत का मानना है कि इससे उत्तर प्रदेश की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत होगी।
सफर का समय आधा हुआ
गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज के बीच यात्रा समय में भारी कमी आई है। पहले जहां यह सफर 10 से 12 घंटे तक लेता था, वहीं अब इसे लगभग 5 से 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हरिद्वार तक विस्तार की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अप्रैल 2026 में उद्घाटित इस परियोजना का विस्तार भी प्रस्तावित है। सरकार की योजना इसे आगे हरिद्वार तक जोड़ने की है, जबकि फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए इसे अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क से भी कनेक्ट किया जाएगा।
