जयपुरिया सनराइज ग्रीन में STP का ज़हरीला पानी बना बड़ा खतरा, GDA का 10 दिन का अल्टीमेटम

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GDA के पुराने दावे भी सवालों के घेरे में

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद।  एनएच-24 स्थित जयपुरिया सनराइज ग्रीन टाउनशिप में रहने वाले हजारों लोगों के लिए हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का दूषित पानी अब पूरे इलाके के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। गंदे पानी के जमाव से जहां बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है, वहीं क्षेत्र में महामारी फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

10 दिन में समाधान नहीं तो सख्त कार्रवाई

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने सख्त रुख अपनाते हुए जयपुरिया सनराइज ग्रीन के बिल्डर को नोटिस जारी कर 10 दिनों के भीतर STP के दूषित पानी की निकासी और समुचित निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तय समय सीमा में कार्य पूरा न होने पर टाउनशिप के टावरों के आंशिक पूर्णता प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिल्डर की होगी। साथ ही दिव्यांश ओनेक्स बिल्डर को भी अपने स्तर पर समस्या के समाधान के लिए कहा गया है।

ऊंचे टावर, लेकिन बुनियादी इंतज़ाम शून्य

टाउनशिप में ऊंचे-ऊंचे टावर बनाकर लोगों को बसाया गया, लेकिन सबसे जरूरी बुनियादी सुविधा, STP के गंदे पानी की निकासी पर कोई ठोस काम नहीं किया गया। स्थिति यह है कि आज तक एक साधारण नाले तक का निर्माण नहीं हो सका, जिससे गंदा पानी जगह-जगह जमा होकर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है।

हर दिन जलभराव, हर पल बीमारी का डर

निवासियों का कहना है:

कॉलोनी में लगातार गंदा पानी भरा रहता है

बच्चों और बुजुर्गों का बाहर निकलना दूभर हो गया है

मच्छरों और संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है

सबसे बड़ा डर यह है कि कहीं STP का दूषित पानी पीने के पानी में मिलकर बड़ी स्वास्थ्य आपदा का कारण न बन जाए।

पुराने दावों पर भी उठे सवाल

गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व GDA के सहायक अभियंता द्वारा इसी मामले में बिल्डर के खिलाफ FIR दर्ज कराने का दावा किया गया था। लेकिन उस दावे का आज तक क्या हुआ, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। न तो किसी कार्रवाई की पुष्टि हुई और न ही कोई परिणाम दिखा। ऐसे में अब यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या उस समय की गई सख्ती केवल कागज़ों तक सीमित रह गई थी ?

अब कार्रवाई या फिर एक और औपचारिकता ?

निवासियों को GDA के ताज़ा नोटिस से उम्मीद तो जगी है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए संशय भी बना हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर इस बार भी सिर्फ नोटिस जारी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

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