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पॉलिटिकल डेस्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार तीन दशक से भी अधिक समय से सत्ता से बाहर कांग्रेस अब खुद को नए सियासी दौर के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रही है। इसी दिशा में पार्टी ने एक अनोखी पहल ‘टैलेंट हंट अभियान’ की शुरुआत की है। लखनऊ से लेकर मेरठ तक कांग्रेस दफ्तर इन दिनों नौकरी के इंटरव्यू जैसे माहौल में बदल गए हैं, जहां पैनल उम्मीदवारों की राजनीतिक समझ, संवाद क्षमता और संगठन के प्रति दृष्टिकोण का परीक्षण कर रहा है।

इन शहरों में चल रहा है टैलेंट हंट
कांग्रेस का यह अभियान यूपी के छह प्रमुख शहरों, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, गोरखपुर, आगरा और मेरठ में आयोजित किया जा रहा है। इन जगहों पर बड़े पैमाने पर इंटरव्यू हो रहे हैं, जिनमें प्रवक्ता और रिसर्च कोऑर्डिनेटर पद के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जा रहा है।
लखनऊ के पार्टी मुख्यालय में सुबह से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। इंटरव्यू पैनल में तीन लोग शामिल हैं, दो वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और एक पत्रकार। उम्मीदवारों से पूछा जा रहा है कि-
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कांग्रेस क्यों लगातार कमजोर हो रही है ?
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वे पार्टी से कब से जुड़े हैं ?
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संगठन को मजबूत करने के लिए उनके पास क्या सुझाव हैं ?
कुछ उम्मीदवार कांग्रेस की हार के पीछे संगठनात्मक ढिलाई को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, तो कुछ अपनी बात शेरो-शायरी के जरिए रखकर अपनी कम्युनिकेशन स्किल साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
चयन प्रक्रिया कैसी होगी ?
टैलेंट हंट के लिए करीब 600 उम्मीदवारों ने आवेदन किया है।
इंटरव्यू के बाद-
पहला फ़िल्टर—योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।
दूसरा चरण—फाइनल इंटरव्यू में पैनल डिस्कशन कराया जाएगा।
तीसरा चरण—उम्मीदवारों की समझ और लेखनी जांचने के लिए लिखित परीक्षा भी होगी।
स्पष्ट है कि कांग्रेस इस बार केवल नाम भर के प्रवक्ता नहीं, बल्कि गहराई से प्रशिक्षित और तर्कसंगत टीम तैयार करने की कोशिश में है।
क्या यह अभियान कांग्रेस को यूपी में फिर से खड़ा कर पाएगा?
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 1989 से सत्ता से बाहर है। वर्तमान विधानसभा में पार्टी के सिर्फ दो विधायक हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह टैलेंट हंट पार्टी को नई ऊर्जा दे सकेगा ? क्या नए प्रवक्ता और रिसर्च टीम, जनता के मुद्दों को प्रभावी रूप से उठा पाएगी ? क्या संगठन के चेहरे बदलने से कांग्रेस की जमीन मजबूत होगी ?
टैलेंट हंट निश्चित तौर पर कांग्रेस की कार्यशैली में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। राजनीतिक पंडित इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताते हैं, लेकिन अंतिम परिणाम आने वाले महीनों में ही सामने आएगा।
फिलहाल इतना तय है कि कांग्रेस यूपी में अपनी सियासी जमीन वापस पाने के लिए नए तरीके, नई सोच और नए चेहरों पर बड़ा दांव खेल चुकी है।