बायोसिटी पार्क में ‘डियर पार्क’ परियोजना को लेकर उठे सवाल
प्राधिकरण पर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप
NEWS1UP
संवाददाता
नोएडा। सेक्टर-91 स्थित बायोसिटी पार्क में प्रस्तावित ‘डियर पार्क’ परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां नोएडा प्राधिकरण द्वारा क्षेत्र में नई थीम आधारित परियोजनाओं और पर्यटन आकर्षण विकसित करने की कवायद की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ सामाजिक संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों ने पहले से विकसित पार्क में तोड़फोड़ और बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। किसान नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता आनंद सरपंच ने आरोप लगाया है कि इस परियोजना के तहत सार्वजनिक धन और हरियाली को अनावश्यक नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि प्राधिकरण का आधिकारिक पक्ष अभी सामने आना बाकी है।
बने-बनाए पार्कों को फिर से उजाड़ा जा रहा
आनंद सरपंच ने सेक्टर-91 स्थित बायोसिटी पार्क का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि यहां प्रस्तावित ‘डियर पार्क’ परियोजना के नाम पर बड़े स्तर पर तोड़फोड़ की जा रही है। उनके अनुसार पार्क में लगी पक्की टाइल्स और फर्श को जेसीबी मशीनों से उखाड़ा जा रहा है, जबकि वर्षों की मेहनत से विकसित हरियाली और पौधों को भी नुकसान पहुंचाया गया है।
उन्होंने कहा कि जिस पार्क पर पहले ही अच्छी-खासी लागत खर्च की जा चुकी है और जो आम जनता के लिए उपयोगी एवं आकर्षण का केंद्र बना हुआ था, उसे दोबारा तोड़कर नई योजना लागू करना सरकारी धन की बर्बादी प्रतीत होता है।
आनंद सरपंच का कहना है कि-
विकास कार्यों के नाम पर कई पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका है।
स्थानीय लोगों में बढ़ा आक्रोश
पार्क में चल रहे कार्यों को लेकर स्थानीय निवासियों, मॉर्निंग वॉकर्स और पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सेक्टर-91 का बायोसिटी पार्क क्षेत्र की पहचान बन चुका था, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग सैर, योग और पारिवारिक समय बिताने आते थे।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नई परियोजना के नाम पर पार्क की मौजूदा सुंदरता और हरियाली को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कुछ लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि यदि किसी नई योजना की आवश्यकता थी तो उसके लिए वैकल्पिक स्थान का चयन किया जाना चाहिए था, न कि पहले से विकसित सार्वजनिक स्थल को नष्ट किया जाए।
जांच हो और जवाबदेही तय की जाए
आनंद सरपंच ने राज्य सरकार और संबंधित उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि विकास कार्यों के नाम पर पहले से तैयार संरचनाओं को तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है, तो इसकी वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनता के टैक्स के पैसे की इस प्रकार बर्बादी और पर्यावरणीय नुकसान को नहीं रोका गया, तो स्थानीय लोग आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
