स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन: 2.89 करोड़ नाम कटने से सियासी हलकों में हलचल!
SIR के बाद यूपी की वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव
6 फरवरी तक दर्ज होंगी शिकायतें, 27 फरवरी तक होगा निस्तारण
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने सियासत से लेकर आम जनता तक को चौंका दिया है। इस बार मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 18 फीसदी है। SIR से पहले प्रदेश में 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 92 मतदाता दर्ज थे, जबकि अब यह संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है।
इस बड़े बदलाव के बाद राजनीतिक दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, वहीं आम मतदाता भी यह जानने को बेचैन हैं कि कहीं उनका नाम भी तो सूची से बाहर नहीं हो गया।
SIR के बाद यूपी में मतदाताओं की ताजा तस्वीर
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, नाम हटने के पीछे अलग–अलग कारण सामने आए हैं-
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कुल हटाए गए नाम: 2.89 करोड़
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स्थायी रूप से यूपी से शिफ्ट हुए: 2.17 करोड़
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मृत घोषित मतदाता: 46.23 लाख
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डुप्लीकेट या लापता नाम: 25.47 लाख
इसके साथ ही मतदाता सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 15,030 नए पोलिंग बूथ भी बनाए गए हैं। SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 12 करोड़ 55 हजार गणना पत्र प्राप्त हुए।
ड्राफ्ट लिस्ट जारी, अब आपत्ति का मौका
फिलहाल चुनाव आयोग ने केवल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की है। यदि किसी मतदाता का नाम इस सूची में नहीं है, या नाम, पता, उम्र जैसी जानकारी में कोई त्रुटि है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
6 जनवरी से 6 फरवरी तक आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। सभी आपत्तियों का निस्तारण 27 फरवरी तक किया जाएगा। 6 मार्च को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी।
नाम कट गया है तो क्या करें ?
अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं दिख रहा है या विवरण गलत है, तो-
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अपने BLO या निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करें।
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फॉर्म-6 भरकर जमा करें।
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तय समयसीमा (6 फरवरी) के भीतर आपत्ति दर्ज कराना जरूरी है, ताकि फाइनल लिस्ट में आपका नाम जोड़ा जा सके।
कैसे डाउनलोड करें यूपी की वोटर लिस्ट ?
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम चेक करने के लिए आसान स्टेप्स-
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https://voters.eci.gov.in/ वेबसाइट पर जाएं।
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Download Electoral Roll पर क्लिक करें।
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राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र, भाषा और कैप्चा भरें।
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वह भाग संख्या चुनें, जिसमें आपका वोट दर्ज है।
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Download Selected PDFs पर क्लिक करें।
कुछ ही सेकंड में वोटर लिस्ट आपके सिस्टम में डाउनलोड हो जाएगी।
सियासी मायने और आगे की राह
2.89 करोड़ नामों का हटना निश्चित तौर पर आने वाले चुनावों पर असर डाल सकता है। विपक्ष जहां इसे बड़े पैमाने पर गड़बड़ी बता रहा है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने के लिए जरूरी थी।
अब निगाहें 6 मार्च पर टिकी हैं, जब फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी। तब तक आम मतदाताओं के लिए यही सलाह है, अपना नाम जरूर जांचें और जरूरत पड़ने पर समय रहते आपत्ति दर्ज कराएं, क्योंकि वोट का अधिकार लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।
