जेवर एयरपोर्ट बना सुरक्षा किला: 5-स्तरीय घेरा, हाईटेक निगरानी में पीएम का कार्यक्रम

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एंटी-सैबोटाज चेक, बम डिस्पोजल स्क्वाड, एंटी-माइंस चेकिंग और स्निफर डॉग्स की तैनाती

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

नोएडा/जेवर। नवनिर्मित जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन समारोह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंधन का भी उदाहरण बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी को देखते हुए पूरा इलाका एक अभेद ‘सुरक्षा किले’ में तब्दील कर दिया गया है, जहां हर गतिविधि पर हाईटेक निगरानी रखी जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश और पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में लागू इस सुरक्षा व्यवस्था में 5-स्तरीय घेरा, एंटी-ड्रोन सिस्टम और हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती शामिल है।

5-स्तरीय सुरक्षा घेरा, एसपीजी की कड़ी निगरानी

कार्यक्रम स्थल को मल्टी-लेयर सिक्योरिटी आर्किटेक्चर के तहत पांच सुरक्षा रिंग में बांटा गया है। हर स्तर पर सघन चेकिंग, बैगेज स्कैनिंग और पहचान सत्यापन किया जा रहा है। एसपीजी के साथ लगातार समन्वय रखते हुए 100 से अधिक एंट्री प्वाइंट्स पर 200 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं। महिलाओं के लिए अलग चेकिंग जोन भी बनाए गए हैं।

5000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी, कई एजेंसियां एक साथ

पूरे क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पुलिस के करीब 5000 जवानों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पीएसी, आरएएफ, एटीएस और सीआईएसएफ जैसी एजेंसियां भी सुरक्षा में लगी हैं। एयरपोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं।

एंटी-ड्रोन और स्निफर डॉग्स की चौकसी

कार्यक्रम स्थल पर एंटी-सैबोटाज चेक के साथ बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS), एंटी-माइंस टीम और स्निफर डॉग्स तैनात किए गए हैं। आसमान में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय है, जबकि क्विक रिएक्शन टीमें हर समय तैयार हैं।

इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया पर पैनी नजर

आईबी और स्टेट इंटेलिजेंस यूनिट्स के साथ रियल-टाइम समन्वय स्थापित किया गया है। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए अफवाहों और संभावित खतरों पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

सीसीटीवी कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर नजर

पूरे एयरपोर्ट परिसर और कार्यक्रम स्थल पर हाई-रिजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनकी निगरानी के लिए विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। आम लोगों की सहायता के लिए कई पुलिस हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं।

आपदा प्रबंधन और मेडिकल इमरजेंसी की तैयारी

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। फायर ब्रिगेड, फायर टेंडर और एम्बुलेंस स्टैंडबाय पर रखे गए हैं। विशेष एम्बुलेंस कॉरिडोर, मेडिकल डेस्क और पहले से तय एवैक्यूएशन रूट्स के जरिए किसी भी आपात स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी की गई है।

ट्रैफिक डायवर्जन और 20,000 वाहनों की पार्किंग

यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विस्तृत ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। करीब 15 निर्धारित पार्किंग स्थलों पर 20,000 से अधिक वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

हाईटेक कम्युनिकेशन सिस्टम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग

सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एन्क्रिप्टेड वायरलेस नेटवर्क और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। रियल-टाइम डैशबोर्ड के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

यमुना क्षेत्र में पेट्रोलिंग, ड्रोन उड़ान पर रोक

यमुना नदी के पास होने के कारण उस क्षेत्र में भी विशेष पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है। पूरे कार्यक्रम क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित कर ड्रोन उड़ाने पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है।

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