बालमुकुंदा रेजिडेंसी में पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ धरने पर बैठे दर्जनों लोग

0

कानूनी नोटिसों और मुकदमों से परेशान करने का आरोप, ऑडिट रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी निगाहें

NEWS1UP

एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क

गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित बालमुकुंदा रेजिडेंसी सोसायटी में रविवार को निवासियों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। सोसायटी के मुख्य द्वार पर बड़ी संख्या में निवासी धरने पर बैठ गए और पूर्व अध्यक्ष एवं अधिवक्ता शबनम खान के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से सोसायटी के निवासियों, विशेषकर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों, को विभिन्न कानूनी नोटिसों और शिकायतों के माध्यम से अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।

धरने के दौरान मौजूद निवासियों ने कहा कि सोसायटी में नए चुनाव होने और नई कार्यकारिणी के गठन के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हो सका है। उनका आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष द्वारा आवश्यक दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के हस्तांतरण में सहयोग नहीं किया जा रहा, जिससे सोसायटी के नियमित संचालन पर प्रभाव पड़ रहा है।

एओए अध्यक्ष विकास शर्मा ने कहा-

विकास शर्मा

निवासियों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नई कार्यकारिणी का गठन किया है। हमारा मानना है कि पूर्व कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी वजह से सोसायटी को आर्थिक नुकसान पहुंचा। हम चाहते हैं कि सभी दस्तावेज नई कार्यकारिणी को उपलब्ध कराए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि सच्चाई सामने आ सके।

धरने में शामिल लोगों का कहना था कि पिछले कुछ महीनों में कई निवासियों को कानूनी नोटिस प्राप्त हुए हैं तथा विभिन्न शिकायतों के चलते उन्हें बार-बार पुलिस और न्यायिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार इससे सोसायटी में तनाव और असहजता का माहौल बना हुआ है।

कोषाध्यक्ष शोभित मित्तल का कहना है-

शोभित मित्तल

नई कार्यकारिणी का उद्देश्य सोसायटी में पारदर्शी और सुचारु प्रशासन स्थापित करना है। लेकिन लगातार जारी विवादों के कारण विकास और रखरखाव से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। निवासियों की अपेक्षा है कि सभी लंबित मामलों का निष्पक्ष समाधान हो और सोसायटी को सामान्य स्थिति में लौटाया जाए।

धरने में शामिल वरिष्ठ निवासी अशोक चौधरी ने कहा कि बड़ी संख्या में निवासी स्वयं को अनावश्यक कानूनी विवादों में उलझा हुआ महसूस कर रहे हैं।

अशोक चौधरी कहते हैं-

अशोक चौधरी

सोसायटी के कई परिवार मानसिक और आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं। हमारी मांग केवल इतनी है कि सभी शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच हो तथा निर्दोष लोगों को अनावश्यक परेशान न किया जाए।

विवाद के केंद्र में वित्तीय मामलों की जांच

धरने के दौरान कई निवासियों ने आरोप लगाया कि सोसायटी में लंबे समय से चल रहे विवाद की जड़ वित्तीय और प्रशासनिक मुद्दे हैं। उनका कहना है कि इन्हीं सवालों को लेकर वर्तमान कार्यकारिणी लगातार जवाब मांग रही है।

हालांकि, पूर्व अध्यक्ष एवं अधिवक्ता शबनम खान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके कार्यकाल से संबंधित वित्तीय मामलों का ऑडिट पहले से ही डिप्टी रजिस्ट्रार के निर्देश पर कराया जा रहा है और रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय से सोसायटी के कुछ लोगों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।

शबनम खान ने कहा-

मुझे व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य माध्यमों पर लगातार टारगेट किया जाता है। मेरे बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं और ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जाती है जिससे मैं सोसायटी छोड़ दूं। मैंने जो भी कदम उठाए हैं, वे कानून के दायरे में रहकर उठाए हैं।

मामले में पुलिस का कहना है कि कुछ शिकायतों के संबंध में न्यायालय से आदेश प्राप्त हुए हैं और उन्हीं के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

थाना प्रभारी, नंदग्राम ने बताया,

न्यायालय से कुछ निवासियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश प्राप्त हुए हैं। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है और किसी भी पक्ष के दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

ऑडिट रिपोर्ट से खुल सकती है विवाद की परतें

बालमुकुंद रेजिडेंसी में चल रहा विवाद अब केवल सोसायटी प्रबंधन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी स्तर तक पहुंच चुका है। वर्तमान एओए और बड़ी संख्या में निवासी जहां वित्तीय एवं प्रशासनिक मुद्दों पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं पूर्व अध्यक्ष शबनम खान स्वयं को निशाना बनाए जाने का आरोप लगा रही हैं।

ऐसे में अब सभी की निगाहें डिप्टी रजिस्ट्रार के निर्देश पर चल रहे ऑडिट और पुलिस जांच पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इन दोनों प्रक्रियाओं के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही विवाद के वास्तविक कारणों और विभिन्न पक्षों की जिम्मेदारियों पर स्पष्ट तस्वीर उभर सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!