लैंडक्राफ्ट गोल्फलिंक हैंडओवर विवाद: सात दिन में पूर्ण हैंडओवर नहीं हुआ तो अवमानना याचिका
IFMS फंड एवं हैंडओवर MOU बना विवाद का केंद्र
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एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क
गाजियाबाद। एनएच-9 स्थित लैंडक्राफ्ट गोल्फलिंक सोसाइटी में पूर्ण हैंडओवर का वर्षों पुराना विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सोसाइटी की अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) ने बिल्डर कंपनी को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर सोसाइटी का विधिवत हस्तांतरण नहीं किया गया तो इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की जाएगी। बिल्डर को लिखे गए पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और यूपी के मुख्य सचिव को भी भेजी गई हैं।
एओए ने बिल्डर पर न केवल हैंडओवर प्रक्रिया को लंबित रखने का आरोप लगाया है, बल्कि करोड़ों रुपये के इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी (IFMS) फंड को रोके रखने और निवासियों से वसूले गए टाउनशिप कॉमन एरिया मेंटेनेंस चार्ज (CAM) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
फायर फाइटिंग सिस्टम ने बढ़ाई चिंता

मामला ऐसे समय में फिर चर्चा में आया है जब हाल ही में अग्निशमन विभाग ने सोसाइटी का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। करीब 1600 परिवारों वाली इस बहुमंजिला परियोजना को अग्निशमन विभाग के निरीक्षण के बाद जारी नोटिस ने निवासियों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। हालाँकि एओए के अनुसार उन्होंने अपने खर्चे पर फायर फाइटिंग सिस्टम में अब काफी हद तक सुधार किया है।
सोसाइटी प्रतिनिधियों का कहना है कि फायर सिस्टम, एक्सपेंशन जॉइंट, बेसमेंट में जल रिसाव, विद्युत सुरक्षा और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य अब भी अधूरे हैं।
एओए बनी, मेंटेनेंस संभाली, लेकिन हैंडओवर नहीं मिला
लैंडक्राफ्ट गोल्फलिंक अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन का पंजीकरण 1 नवंबर 2023 को हुआ था। इसके बाद 1 दिसंबर 2023 से निर्वाचित एओए ने सोसाइटी की मेंटेनेंस व्यवस्था का दायित्व संभाल लिया था। एओए का आरोप है कि इसके बावजूद बिल्डर ने आज तक हैंडओवर-टेकओवर समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए और न ही सोसाइटी से जुड़े सभी वैधानिक दस्तावेज, स्वीकृत नक्शे तथा अन्य अभिलेख हस्तांतरित किए।
एसोसिएशन का कहना है कि मौखिक आश्वासनों के आधार पर जिम्मेदारियां तो सौंप दी गईं, लेकिन कानूनी रूप से हैंडओवर प्रक्रिया अधूरी छोड़ दी गई।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, जीडीए ने भी की सुनवाई

लंबे समय तक समाधान न निकलने पर एओए ने जनवरी 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली। याचिका संख्या 5644/2025 पर सुनवाई के बाद 27 मई 2025 को न्यायालय ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) को एओए की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
इसके बाद जीडीए ने कई दौर की सुनवाई और स्थलीय निरीक्षण कराए। प्राधिकरण ने बिल्डर को आवश्यक कमियां दूर करने तथा हैंडओवर प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए। हालांकि एओए का आरोप है कि न्यायालय और प्राधिकरणों के निर्देशों के बावजूद पूर्ण अनुपालन अब तक नहीं हुआ है।
अधूरे कार्यों की लंबी सूची अब भी बरकरार
एओए का कहना है कि सोसाइटी में फायर सुरक्षा, एक्सपेंशन जॉइंट, बेसमेंट में पानी की लीकेज, पुरानी लिफ्टों के प्रतिस्थापन, विद्युत व्यवस्थाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई कार्य अभी भी शेष हैं।
हालांकि जीडीए के निर्देशों के बाद कुछ कार्य जैसे नए जनरेटर स्थापित करना, क्लब हाउस का नवीनीकरण और लैंडस्केपिंग क्षेत्र का सौंदर्यीकरण किया गया है, लेकिन एओए का कहना है कि पूर्ण हैंडओवर के लिए आवश्यक सभी शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं।
IFMS एवं सिंकिंग फंड को लेकर भी टकराव
विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू IFMS फंड है। एओए का दावा है कि निवासियों से वर्षों के दौरान एकत्र किया गया सिंकिंग तथा आईएफएमएस फंड सोसाइटी निवासियों की संपत्ति है और यह फंड अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को वापस मिलना चाहिए।
पूर्व में जीडीए को दिए गए पत्र में लगभग 15 करोड़ रुपये के IFMS फंड का उल्लेख किया गया था। एसोसिएशन का कहना है कि फंड का हस्तांतरण न होना वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
CAM शुल्क की वैधता पर उठे कानूनी प्रश्न

एओए ने टाउनशिप कॉमन एरिया मेंटेनेंस चार्ज (CAM) की वसूली को लेकर भी गंभीर कानूनी सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि जब तक सोसाइटी का विधिवत हस्तांतरण एओए को नहीं हो जाता, तब तक बिल्डर द्वारा CAM शुल्क वसूले जाने की वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
एओए ने मांग की है कि CAM शुल्क की वसूली तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा पूर्व में वसूली गई राशि की समीक्षा कर उसे निवासियों को लौटाया जाए।
सात दिन में पूरी करने को कही गई प्रमुख मांगें
एओए ने बिल्डर के समक्ष सात दिनों के भीतर निम्न मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है।
सभी लंबित तकनीकी एवं सुरक्षा संबंधी कार्य पूरे किए जाएं
फायर सिस्टम को पूर्ण रूप से संचालित कर वैध फायर एनओसी प्राप्त की जाए
हैंडओवर-टेकओवर एमओयू पर हस्ताक्षर कर विधिवत हस्तांतरण किया जाए
IFMS फंड निर्वाचित एओए को सौंपा जाए
टाउनशिप CAM शुल्क की वसूली बंद कर पूर्व में वसूली गई राशि लौटाई जाए
अब और प्रतीक्षा का कोई औचित्य नहीं : AOA
एओए के सचिव एवं अधिवक्ता प्रभात चौधरी ने कहा कि सोसाइटी के निवासी वर्षों से पूर्ण हैंडओवर की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रभात चौधरी का कहना है कि-

हाईकोर्ट के आदेश, जीडीए के निर्देशों और लागू कानूनों के बावजूद यदि हैंडओवर प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो यह गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा, हमने बिल्डर को अंतिम अवसर दिया है। यदि निर्धारित अवधि में समाधान नहीं हुआ तो एओए न्यायालय में अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए बाध्य होगी।
गाजियाबाद की अन्य सोसाइटियों पर भी पड़ सकता है असर
रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि यह मामला अवमानना कार्यवाही तक पहुंचता है और न्यायालय इस पर कोई महत्वपूर्ण निर्णय देता है तो इसका प्रभाव केवल लैंडक्राफ्ट गोल्फलिंक तक सीमित नहीं रहेगा।
गाजियाबाद की उन अनेक आवासीय परियोजनाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है, जहां वर्षों बाद भी हैंडओवर, आईएफएमएस फंड और प्रबंधन अधिकारों को लेकर विवाद बने हुए हैं। ऐसे में यह मामला अपार्टमेंट स्वामियों के अधिकारों और बिल्डरों की जवाबदेही से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
